Sunday, 13 October 2019

पक्षी प्रेम (आत्ममंथन)

     आत्ममंथन

रात को दूध लेने मदर डेयरी पहुंचा तो दूध खत्म हो चुका था थोड़ा जल्दी का अलार्म लगाया सोचा कल जल्दी नित्यकर्म निपटा कर दूध ले आऊंगा क्योंकि 9:00 बजे तक मरम्मत कार्य हेतु मिस्त्री को आना था, सुबह उठकर दूध ले आया और प्रभात का आनंद लेने छत पर पहुंचा नवरातों के सुंदर भोर शीतल पवन के झोंके शरीर और मन को आनंदित कर रहे थे इन दिनों में प्रकृति अपनी समान अवस्था में होती है ना गर्मी की तपन ना जाड़े की ठिठुरन ! इस सुबह में एक प्यारा अहसास था चारों ओर शांति ताजगी और पंछियों की चहचहाहट और अचानक ! एक चिड़िया मेरे छत की मुंडेर पर रखे पानी के कसोरे के पास आकर बैठ गई बड़ी उत्सुकता से कूदकर कसोरे पर चढ़ी पर शायद पानी ना होने के कारण इधर-उधर झांककर मेरी ओर आशा भरी निगाहों से देखा मानो पूछ रही हो इतना तो कर सकते हो हमारे लिए पानी तो मोल नहीं आता तुम भी तो इतना व्यर्थ करते हो|
    घर पर मरम्मत के चलते पिछले दिन पानी डालना शायद भूल गया था नन्ही चिड़िया कि वह नजरें मुझे अपराधिक सा महसूस करा रही थी एक अजीब सा पश्चाताप मुझे झकझोर गया ! हम किसी को कुछ देने वाले कौन हैं देता तो ईश्वर ही है पर हमें निमित्त तो बनाया है उसने तो क्यों अपने कर्तव्य को ठीक से नहीं समझा, मेरा आज देर से उठना मुझे अपराध बोध का आभास करा रहा था, ना जाने कितने पंछी  आकर लौट जाते होंगे भोर में क्योंकि वह हमारी तरह 7:00 बजे नहीं उठते पार्कों में कितने ही व्यक्ति चिड़ियों को दाना डालते हैं पर शायद किसी ज्योतिषी या पंडित के कहने पर या अपने ग्रह ठीक करने या पुण्य कमाने के लिए पर क्या किसी ने देखी होगी नन्ही चिड़िया की प्रश्नवाचक  दृष्टि ??
जो हमसे कुछ अपेक्षाएँ रखती है|  

                 ~ सुबोध कुमार


Subodh kumar
Delhi
I m estate agent by profession
& writer by passion
  Book writen- -  मेरे मन के गांव में ( कविता संग्रह)

Sunday, 6 October 2019

नवरात्रि के पावन अवसर पर माता के आशीर्वाद स्वरूप कुछ दोहे साहिल की कलम से (06/10/2019)

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             दोहे

माता  की  किरपा  रहे, सभी  करे  गुणगान |
कष्ट हरण संबल मिले, हो जीवन सुख मान||

नवदुर्गा  की  शक्ति से, असुर  गये सब हार|
शक्ति साधना से हटे, विकल कष्ट का भार||

मन मन्दिर को साध लो, नत मस्तक हो शीश|
भव  बंधन  माता  हरे, मिले  स्नेह  आशीष||

कंटक  पथ  सुन्दर बने, सब  में हो  सहकार|
माँ  वरदा  आशीष  से, भव  बंधन  हो पार||

माँ  दुर्गा  आशीष  से,  हो  जीवन  आसान|
तेजवीर  रवि  तेज से, मिले  धवल वरदान||

© डॉ० राहुल शुक्ल साहिल






पत्तल दोना परई (सकोरा) व मिट्टी के बर्तन व गिलास में भोजन करने व पानी पीने के वैज्ञानिक लाभ


आओ जाने पत्तल- परई (सकोरा) व मिट्टी के गिलास में भोजन करने के  वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक लाभ — —
पत्तलों की परंपरा अद्वितीय है इसे फिर से अपनाएँ ... अब तो जर्मनी और ब्रिटेन भी हरे पत्तों की प्लेट बना रहा है! ००००००
पत्तल में भोजन के अद्भुत लाभ...
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में 2000 से अधिक वनस्पतियों की पत्तियों से तैयार किये जाने वाले पत्तलों और उनसे होने वाले लाभों के विषय में पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान उपलब्ध है पर मुश्किल से पाँच प्रकार की वनस्पतियों का प्रयोग हम अपनी दिनचर्या में करते है।
आम तौर पर केले की पत्तियों में खाना परोसा जाता है। प्राचीन ग्रंथों में केले की पत्तियों पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है। आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियों का यह प्रयोग होने लगा है।
सुपारी के पत्तों से बनाई गई प्लेट, कटोरी व ट्रे, जिनमें भोजन करना स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक है।
जिसे प्लास्टिक, थर्माकोल के ऑप्शन में उतरा गया है क्योंकि थर्माकोल व प्लास्टिक के उपयोग से स्वास्थ्य को बहुत हानि भी पहुँच रही है ।

#_सुपारी के पत्तों यह पत्तल केरला में बनाई जा रही हैं और कीमत भी ज्यादा नही, तक़रीबन 1.5, 2, रुपये साइज और क्वांटिटी के हिसाब से अलग अलग है।
#_पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
#_केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है।
#रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है। पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी इसका उपयोग होता है। आम तौर पर लाल फूलो वाले पलाश को हम जानते हैं पर सफेद फूलों वाला पलाश भी उपलब्ध है। इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासीर (पाइल्स) के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है।
#_जोड़ो के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल उपयोगी माना जाता है। पुरानी पत्तियों को नयी पत्तियों की तुलना मे अधिक उपयोगी माना जाता है।
#_लकवा (पैरालिसिस) होने पर अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलों को उपयोगी माना जाता है।
पत्तलों से अन्य लाभ :
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है।
2. न पानी नष्ट होगा।
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा।
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे l
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी।
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी।
7. प्रदूषण भी घटेगा।
8. सबसे महत्वपूर्ण झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है, एवं मिटटी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है।
9. पत्तल बनाने वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा।
10. सबसे मुख्य लाभ, आप नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा। जो जल प्रदूषण में आपको सहयोगी बनाता है।
सभी लोगों को भंडारे, विवाहोत्सव, जन्मोत्सव आदि भोज एवं अन्य शुभ उत्सवों एवं पार्टियों  में डिस्पोजल की जगह इन पत्तलों का प्रचलन करना चाहिए।
       धन्यवाद
                  संकलन~  डॉ० राहुल शुक्ल साहिल
                        संजीवनी वेलफेयर सोसाइटी,
                मिश्रा मार्केट, कालिन्दीपुरम चौकी के पास,
                         राजरूपपुर, प्रयागराज उ०प्र०

शिव छन्द (राम - राम)

🍁🎊 शिव छंद 🎊🍁         चार चरण प्रति चरण ११ मात्राएं, ३,६,९, वीं मात्रा लघु | दो-दो चरण सम तुकांत , आवश्यकतानुसार गुरु को २ लघु में लिख स...