Friday, 22 May 2020

वट वृक्ष/ बरगद ["जय जय हिन्दी" वाट्सएप पटल विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत द्वारा संचालित] विषय पर साहित्यकारों की अद्भुत लेखनी

[22/05, 16:20] +91 79035 61629:
             🥦वट /बरगद🥦
               छंद- कुंडलिया

अपना भारत देश  है, यूँ  ही  नहीं  महान ।
तुलसी पीपल ही नहीं, वट में भी भगवान।।

वट  में  भी भगवान,  पूजते  हैं  नर - नारी।
वृक्षों का सम्मान, रीति यह कितनी न्यारी ।।

हरा -भरा  हो देश, सभी  का  है यह  सपना ।
पुलकित हो परिवेश, उमंगित जीवन अपना ।।

-रामस्वरूप मयूरेश 🙏

[22/05, 16:36] +91 99349 63293:

       आज का विषय ~ बरगद

बरगद की छांव में 
जीवन के रंग में ,
यादों के परिन्दें ,
यूँ मचल मचल जाता है, 
कोई नहीं जानता ,
ये बरगद की छांव में, 

मै रहूँ न रहूँ मेरा, 
अस्तित्व  रहेगा, 
जीवन के ढाल में ,
मजबूरी के हाथों में, 
तू बरगद की छांव में ,

हालात इधर भी हैं ,
उधर भी हैं ,
क्या पता इसी बहाने, 
तुम पास रहों या दूर ,
यूँ बरगद की छांव में!

~ रूपेश कुमार©
स्वरचित एव मौलिक

[22/05, 16:40]
        बरगद

बरगद का वह पेड़ पुराना
कहता है नित नया तराना
सदियों की गाथा को कहता
एक बुजुर्ग सम खड़ा है रहता।

इसके आँचल की घनी छाँव में
लगती बैठक सदा गाँव में
लाखों  पंछी  करें बसेरा
रिश्ता प्यारा इसका मेरा।

सावित्री ने पूजा करके
यम से लड़ने की ली ठान
यम के द्वार पहुँच कर वापस
लायी  सत्यवान के प्राण।

ओम प्रकाश फुलारा "प्रफुल्ल"

[22/05, 16:46] +91 80922 36568:
      चौपाई

आओ  बरगद सभी  लगाएं,
कुदरत को हम अभी सजाएं।

प्राण वायु से जीवन
जीवन की यह राह दिखाए।

वृक्ष सनातन धर्म हमारा,
वट चलावे संसार सारा।

प्राणवायु इससे ही आवे,
यही समीर देव मिलवावे।

आ बचाएं अभी हरियाली,
तब मनेगी अबकी दिवाली।

बरगद देता हवा सुहानी,
यह चलावे पवन मस्तानी।

कहानी कहे मेरी नानी,
वट लाता बादल से पानी।

कलकल बहती नदिया कहती,
इससे ही तो दरिया बहती।
महेश"अमन"
[22/05, 16:57] +91 99207 96787: 9920796787****रवि रश्मि 'अनुभूति '

   🙏🙏

   वट / बरगद
============
वट वृक्ष है घना छायादार
फैला लगे यह मायादार
खिंचे सब हैं आते इस ओर , 
बना सभी का यही आगार ।

ऊँचा दीर्घजीवी पेड़ पुराना
पूरे गाँव का आशियाना
सभी करते सलाह मशवरा ,
सबमें है बस यही सयाना ।

पूरी छाया सबको देता
परोपकार कर सुखी होता
देता ऑक्सीजन शुद्ध वायु ,
वातावरण पवित्र हो जाता ।

वट की सदैव पूजा होती
मन्नत भी तो पूरी होती
पंछियों का बसेरा है यह ,
छाँव भी कितनी घनी होती ।
%%%%%%%%%%%%%%%

(C) रवि रश्मि 'अनुभूति '
22.5.2020 , 436 पीएम पर रचित ।
#####################

●●
🙏🙏समीक्षार्थ व संशोधनार्थ ।🌹🌹
[22/05, 16:58] Nitendra Singh Parmar भारत: *गीत:- बरगद*

बरगद  नींचे खेल सदा,हमनें तो खेलें हैं।
चाहें हो चार जने हम, चाहें तो अकेले हैं।।
बरगद नींचे खेल सदा........

बहुत पुराना पेड़ बड़ा था,सबकों देता छांव था।
उसी पेड़ से सुंदर दिखता मेरा प्यारा गाँव था।।
लटे लटकती उसकी देखो उसी पे झूले हैं।।
बरगद नींचे खेल सदा हमनें......1

बना हमारा दोस्त वो प्यारा,कभी नहीं भरमाये।
लुका छिपी उसके संग खेलूं,वो निसदिन सरमाये।।
उसकी छांव में जाने कितने लगते मेले हैं।।
बरगद नींचे खेल सदा हमनें.......2

स्वच्छ हवा हम सबको देता,कभी नहीं इतराता।
नहीं कभी हम मिलने जाये, तो वो घबरा जाता।।
भारत दुनियाभर में देखों, कितने झमेले हैं।।
बरगद नींचे खेल सदा हमनें.......3

नीतेंद्र सिंह परमार "भारत"
छतरपुर मध्यप्रदेश
[22/05, 16:58] बाबा बैद्यनाथ झा जी: प्रदत्त विषय पर एक कुण्डलिया सादर समीक्षार्थ--

                           ॐ
              विषय--*वट/बरगद*
                *कुण्डलिया छन्द*
                @बाबा बैद्यनाथ झा

करती    हर   सौभाग्यिनी,   वटसावित्री    पर्व।
दीर्घ आयु पति को मिले,जिस पर पुनि हो गर्व।।

जिस   पर   पुनि  हो  गर्व,करे  श्रद्धा  से पूजा।
पति   ही   हैं  सर्वस्व, नहीं  उनके   सम  दूजा।

सत्यवान    को   पूज,  डालियाँ   नारी  भरती।
*वट*  में  धागे  बान्ध, व्रती फिर  पूजन करती।।
[22/05, 17:14] +91 98440 94937: विषय : एक बरगद की कथा
विधा : अतुकान्त रचना

दादा के दादा ने एक बरगद का पेड़ लगाया,
किसको मालूम था कि एक दिन यह भी बूढ़ा हो जायेगा।
बरगद ने छाया दी,
बरगद ने आश्रय दिया, न जाने कितनों को
कितनों के बने आशियानें, बरगद की शाखों पर
बरगद बाहें पसारे बुलाता रहा सबको,
समाता रहा सबको,
फिर भी किसी ने कुल्हाड़ी चला दी,
किसी ने ताने दिए,
किसी ने मन्नत का धागा बांध दिया
और किसी सुहागन ने सुहाग के फेरे लिए।
बरगद ने सब कुछ देखा, सब कुछ सहा,
कभी भोगा आलिंगन और कभी बिरह।
पर दुखी हो गया बरगद, जब मैं बूढ़ा हो उसकी शरण में आया,
तिरस्कृत सा, परिवार का सताया हुआ
मैंने उसकी बांह पकड़ ली
उसकी डालियों से चिपक कर मैं बहुत रोया,
और उसकी एक धरती की ओर आने वाली शाख से लटक गया।
मैंने तो सिसक-सिसक अपना दम तोड़ दिया,
पर बरगद रोया, वह बहुत रोया,
आह ! क्यूं न मुझे बचा पाया।
जिन पूर्वजों ने उसे जन्म दिया था,
उनका कर्ज़ क्यूं न चुका पाया!
आज वह सचमुच बहुत बूढ़ा हो गया
आज वह सचमुच बहुत बूढ़ा हो गया।

मधु सक्सेना
बंगलौर
२२.०५.२०२०

संशोधित
[22/05, 18:34] +91 73026 85435: बड़मावस को पूजते,मिलकर सब वट  पेड़।
सब गुण प्रतिदिन पूजिए,चाल न चलना भेड़।

पतझड़ में भी हो हरा, बरगद पेड़ विशाल।
जड़ फल छाल पत्र तना, करते सभी कमाल।

पावन बरगद दे हमें, साफ हवा दिन रात।
गंदी बदले साफ में,यही अनोखी बात।

फोड़े फुन्सी हैं त्वचा, दांत मसूड़े घाव।
वट-जड़ काढ़ा पी भगे,मधुमेह औ तनाव ।

रक्त वसा से हो दुखी, सिर के झड़ते बाल।
चर्म रोग में ले सदा, काढ़ा वट की छाल।

हितेन प्रताप सिंह तड़प
मेरठ उत्तर प्रदेश
हिंदुस्तान
समय से न भेज पाने के  कारण क्षमाप्राथी हू।
[22/05, 19:48] +91 94126 80810:

विषय         -     वट  /  बरगद
विधा          -      मुक्त

वट वृक्ष है अद्भुत जग में
युगों से दे रहा प्राण वायु ये
देवालय सा  है पावन ये
तीन देवों का परम् द्वार  ये..।।

दुखियों को यह आश्रय देता
संताप सभी के है हर लेता
विश्वकोष सा है विशाल ये
सभी ग्रन्थों का है सार ये..।।

अखण्ड सौभाग्यवती वर दे
सावित्री को था अमर बनाया
संजीवनी सी औषधि देकर
तुमने वैद्यों का मान बढ़ाया ..।।

महाकाय हो अजान बाहु तुम
सुनते सबकी करुण पुकार
व्यथा दुखियों की सुन करते बेड़ा पार
पूरी करते कामना है यही विश्वास..।।

आए जो भी शरण, मिले अभय दान
पशु, पक्षी,मानव सबका हो कल्याण
निराश न होता कोई, बनते सबके काम
इस धरा पर वट समान, दूजा न धाम

डॉ.राजेश कुमार जैन
श्रीनगर गढ़वाल
उत्तराखंड

शिव छन्द (राम - राम)

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