Wednesday, 4 December 2019

छन छन पयलिया भोजपुरी गीत (कवि श्याम कुंवर भारती)

भोजपुरी गीत (श्रिंगार रस )- छन छन पयलिया

छन छन पयलिया ना बजावा गोरी |
ठहरल पनिया अगिया ना लगावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
मिसरी से मिठ लगे तोहार बोलिया |
मनवा भरमावे बोले जईसे कोइलिया |
पुरवा अँचरा ना उड़ावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
महके बदनवा जईसे केसर गंधवा |
चहके नयनवा जइसे कमल बँधवा |
सुतल असिया ना जगावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
हंसेलु त लागे जईसे मोती झरे मुहवा |
जेने जेने जालू खिले फुलवा तहवा |
खन खन कंगना ना खनकावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
लागल आसरा बनबू हमरो रनिया |
केसिया उड़ावेलू त बरसे घटा पनिया |
भारती के आसरा पुरावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |

श्याम कुँवर भारती [राजभर]
कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

परिवर्तन (कवि देवेन्द्र चौधरी तिरोडा जी)

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              परिवर्तन

मुझे सत्य एव अहिंसा के ये दो रतन चाहिए.
हराभरा खुशनुमा सिर्फ मेरा ये वतन चाहिए.

मेरे जबान से निकले है मेरे जो लब्ज दो टूक,
है मालिक असत्य एव हिंसा का पतन चाहिए.

जिंदगी के हर हालात जिसने जीना सिकाया,
सिर्फ तो दाल चावल रोटी पकाने बर्तन चाहिए।

हसीन वादियों में बसा मेरा भारत देश महान,
हर भारत के वासियों के हातो से जतन चाहिए।

खयाल आता नही इस दौर में किसीका मुझे,
देशमे विकाससंग विचारोंका परिवर्तन चाहिए।
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✍ कवि-देवेंद्र चौधरी, तिरोडा
जिला-गोंदिया (महाराष्ट्र)
ता. 20/11/2019 को
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पाखण्ड (भुवन बिष्ट जी)

विषय :-  पाखण्ड
विधा :- कुण्डलिया

धरती पर पाखण्ड का , सजा हुआ बाजार ।
मानव फसते जा रहे ,  होकर  के  लाचार ।।
होकर  के  लाचार , सभी  झांसे  में  आते ।
मलते हैं फिर हाथ , ठगा  सा खुद  को पाते।
कवि कहे एक बात , लालसा कभी न मरती ।
करता  जो  पाखण्ड , नष्ट  कर देती  धरती ।।

बनकर भूखे भेड़िये , पड़ते  हैं  सब टूट ।
धर्म-कर्म के नाम पर , मची पड़ी है लूट ।।
मची  पड़ी  है लूट , बहुत  हैं  यहाँ लुटेरे ।
मंदिर ,मस्जिद ,चर्च , डालते हैं सब डेरे ।।
झूठी चलते चाल , रहे सब सीना तनकर ।
रचते  हैं  पाखण्ड , लूटते  साधु बनकर ।।

मानव नित पाखण्ड कर , रचते  रहते  स्वांग ।
लोगो  को  हैं  फांसते , रखते अपनी  मांग ।।
रखते अपनी  मांग , करे  हैं सब  मन -मानी ।
धर  साधु  का  वेश , फिरे  हैं  बनकर ज्ञानी ।।
कहुँ मैं  मन  की बात , बन रहा क्यों है दानव ।
अपनी सब पहचान , आज खोता क्यों मानव ।।

        हरीश बिष्ट
रानीखेत ।। उत्तराखण्ड ।।

विश्व जनचेतना ट्रस्ट (विशेष सूचना)

🙏💐विशेष सूचना🙏💐

पटल पर किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो इसके लिए आप सभी को कुछ बातें स्पष्ट करना चाहता हूँ।

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत द्वारा चार पटलों का संचालन किया जा रहा है-

१ जय जय हिंदी - इस पटल पर केवल लिखित रचना प्रेषित की जाएंगी। इसके अलावा किसी भी प्रकार की सामग्री वर्जित है।

२ जय जय काव्य चित्रशाला- इस पटल पर आप अपनी उपलब्धियों से सम्बंधित चित्र या कोई अन्य सामग्री जो आप साझा करना आवश्यक समझते हैं वही प्रेषित की जाए। इस पटल पर किसी भी प्रकार की लिखित या रचनात्मक सामग्री वर्जित है।

३ साहित्यिक पाठशाला- इस पटल पर सीखने सिखाने की इच्छा रखने वाले साहित्यकारों का स्वागत है इस पटल का निर्माण केवल सीखने सिखाने म निमित्त किया गया है। इस पटल पर 100 रुपये सदस्यता शुल्क के साथ ही प्रवेश प्राप्त किया जा सकता है।

४ नारी समृद्धि मंच- यह पटल महिलाओं के उत्थान, महिला जागृति एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। यहाँ केवल महिलाओं को ही शामिल किया जाएगा इच्छुक महिलाएँ संपर्क करें।

नोट:- जय जय हिंदी हम सबका एक परिवार है जब हम सब लोग मिलजुल कर एक साथ कदम बढ़ाते हुए चलेंगे तभी हमारा यह परिवार बुलन्दियों को छू पाएगा। आइए हम सब मिलकर नियमपूर्वक अपने परिवार की समृद्धि के लिए कार्य करें । तन मन धन से आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।

ओम प्रकाश फुलारा "प्रफुल्ल"
अध्यक्ष
प्रदेश इकाई उत्तराखंड
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत
9411583567

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत का प्रथम स्थापना दिवस (30 नवम्बर 2019)

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत का प्रथम स्थापना दिवस समारोह ~30/11/2019
यात्रावृत्त सह संस्मरण

पूर्व निर्धारित योजनानुसार प्रिय मित्र आलोक सैनी जी ने प्रातः 3:30 बजे फोन करके मुझे जगाया और प्रातः पाँच बजे हमारे घर आ धमके|हम भी संस्था की आवश्यक सामग्री एक बैग में रखकर, एक बैग में कुछ फल और एक बैग में स्वयं का आवश्यक सामान भरकर स्वयं को तैयार कर ,हम दोनों चाय पीकर 5:50 बजे घर से निकल गये, आलोक जी ने गैराज से गाड़ी निकाली और 6:10 पर आ. कौशल पाण्डेय आस दादाश्री के घर की ओर लपके, दरवाजे पर पहुँचकर हार्न पर हार्न बजाना शुरू किया तब जाकर आस दादाश्री निकले, फिर राजेश मिश्र प्रयास जी के घर की ओर बढ़ चले कि याद आया कि कि कुछ सामान कह गया है, आस दादाश्री से घर से वह सामान लेने हम आस दादा के साथ पैदल ही निकल पड़े, सामान लेकर गाड़ी तक पहुँचे और गाड़ी आ. प्रयास जी के घर की ओर बढ़ी, प्रयास जी सड़क पर ही खड़े नजर आये, जल्दी से बैठाया और कार अपने लक्ष्य की ओर दौड़ने लगी, फिर बातों का सिलसिला चल पड़ा|ऐसा लग रहा था कि मानो गाड़ी और बातों की स्पीड प्रतिस्पर्धा कर रही हो |
शीघ्र ही बरेली पहुँच गया था आ. राजेश मिश्र प्रयास जी को एक काम से किसी से मिलना था, वहाँ गया, काम निपटाया, चाय नाश्ता किया और आगे बढ़ गया|
मुरादाबाद पहुँचा, वहाँ हम सबको एक चौराहे पर छोड़कर आलोक जी आ. रश्मि वर्मा रश जी को लेने उनके घर गये और हम सब सड़कें नापते रहे|
पौन घण्टे बाद आपके दर्शन हुए, कब तक हम सब चाय नाश्ता कर चुके थे, मैंने पान खाया और कार पर बैठ आगे बढ़ गया, कुछ दूर आगे बढ़ने पर भूख ने जोर पकड़ा, एक ढाबे पर रुका, रश्मि जी पूड़ी, मेंथी सब्जी लायी थीं, और प्रयास जी कचौड़ी चटनी लाये थे, ढाबे से चाय ली और खाने पर टूट पड़े, खा पीकर आगे बढ़े, प्रयास जी ने अमरूद रास्ते में खरीदे थे अब उनका नम्बर था|प्रयास जी काला नमक लगा लगाकर दे रहे थे और हम सब गटक रहे थे |कुछ और आगे बढ़कर गुलाबजामुन खाये, मजा आ गया, फिर आगे की ओर लपके, रास्ते में उत्तराखंड अध्यक्ष ओमप्रकाश फुलारा प्रफुल्ल जी जो कि सुबह ही पहुँच चुके थे और महाराष्ट्र के देवेन्द्र चौधरी जी भी आ गये थे, से बात होती रही|आ. सुशीला धस्माना मुस्कान दीदी भी दिल्ली से आ रहीं थीं|प्रभु कृपा से शाम चार बजे हरिद्वार पहुँच ही गये |माता वैष्णो देवी शक्ति धाम में कार्यक्रम की और रुकने का व्यवस्था पूर्व निर्धारित थी|चाय पीकर कुछ व्यवस्थाओं का अवलोकन किया, माता वैष्णो देवी ट्रस्ट के महंत श्री सुमित जी महाराज के मुलाकात थी सौम्यता सहजता, सरसता और विनम्रता आपके गुणों की चमक को बढ़ा रहा था|कुछ देर बाद मैं प्रफुल्ल जी के साथ घूमने चला गया, फिर लौकर फूल माला की व्यवस्था की, प्रयास जी के बच्चे की, मुस्कान दीदी और उनकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है जब यह समाचार मिला तो मन दुःखित हुआ|पर संयम के साथ कार्यक्रम को सम्पन्न करना था, अतैव सामान्य सा दिखा|
      शाम 6:30 पर माता सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम अध्यक्ष आ. गुरुजी महंत श्री दुर्गा दास जी महाराज ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया |तत्पश्चात सभी साहित्यकारों का स्वागत अभिनंदन किया गया |आ. देवेन्द्र चौधरी जी को विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत की महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष बनाया गया और आ. रश्मि वर्मा रश जी को नारी समृद्धि मंच का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, इस आशय का सम्मान पत्र, माला व पुष्प गुच्छ ,बाँसुरी, मुहब्बत गजल संग्रह, नंदिनी काव्य संग्रह, दोशाला ओढ़ाकर ,बैज लगाकर प्रदान किया गया |उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष आ. ओमप्रकाश प्रफुल्ल जी को रजत पत्र के साथ 1000₹ की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया |आ. दुर्गा दास महाराज जी को व आ. महंत श्री सुमित मिश्रा जी महाराज की भी यथोचित अंगवस्त्र के साथ सम्मानित किया गया |आ. जागेश्वर प्रसाद निर्मल दादाश्री द्वारा रचित पुस्तक यजुर्वेद प्रकाश का विमोचन आ. महंत श्री दुर्गा दास जी महाराज ने किया ,जिसमें सभी रचनाकारों ने भाग लिया |अन्य रचनाकारों का भी यथोचित स्वागत सत्कार करने के बाद एक दौर कविता का चला, आनंद आ गया |
  कार्यक्रम समापन वेला में आ. मुस्कान दीदी भी मिठाई लेकर आ गयीं ,उनका भी ससम्मान स्वागत किया गया, कुशलक्षेम पूछी, उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, फिर सभी साथियों ने स्वादिष्ट भोजन किया और सर्दी होने के कारण कमरे में एकत्रित हुए,सबको मुस्कान दीदी ने मिठाई खिलाई, और किए गये वादानुसार सबके 500₹ आ. प्रफुल्ल जी ने वापस किए|फिर काफी देर बातें हुईं |कई साथियों ने संस्था को स्वेच्छापूर्वक सहयोग राशि प्रदान की|
आ. रश्मि जी ~500₹
आ. देवेन्द्र चौधरी जी ~500₹
आ. आस दादाश्री ~500₹
आ. मुस्कान दीदी ~500₹
आ. कौशल आस दादा ~500₹
आ. प्रफुल्ल जी ~500₹
आ. प्रयास जी ~500₹
इस पावन यज्ञ में 1000₹ की आहुति मेरे द्वारा भी समर्पित की गयी|मुस्कान दीदी के साथ अन्य कई साथी लोग आये थे जो हरिद्वार से ही थे, विदा ले उन्हीं के साथ चली गयीं|बातें करते करते हम सब सो गये |
प्रातः उठा ही था कि देखा आ. रश्मि जी चाय बनाकर ले आयीं थीं सबने चाय पी, आ. रश्मि जी का स्वभाव बहुत ही मृदुल है, सौम्य आस्थावान, दयावान व्यक्तित्व, आपकी सहनशीलता और कुछ कर गुजरने की ललक सबको आकर्षित कर लेती है |
सभी दैनिक क्रिया से निपट कर विचारगोष्ठी कक्ष में पहुँचे, जिसकी अध्यक्षता महंत श्री सुमित मिश्रा महाराज जी ने की|जहाँ विशिष्ट अतिथि के रूप में एक और संत शिरोमणि साक्षी को रूप में बैठे थे|जहाँ सभी पदाधिकारियों के विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के कार्यों को गति देने वाले अपने अपने विचारों को रखा, बृद्ध सेवा घर के निमित्त संस्था को एक लाख रुपये जमीन क्रय करने हेतु देने की घोषणा आ. आलोक सैनी जी ने की|प्रिय प्रयास जी का सरस प्रयास प्रफुल्ल जी की सक्रियता, आस जी का विश्वास,  देवेन्द्र आलोक के साथ मुस्कान रश्मि आनंद का कारण बनती है, जो संस्था विकास की दिशा निर्धारण में सम्बल बनती है, यह गौरव का विषय है | आ. कार्यक्रम अध्यक्ष सुमित मिश्रा जी महाराज ने कहा कि माता वैष्णो देवी शक्ति धाम आपका है जब चाहें कार्यक्रम करें, आप सबके लिए हमेशा इसके द्वार खुले हैं|महाराष्ट्र की धरती से पधारे देवेन्द्र चौधरी जी ने बरबस ही सबको वश में कर कर लिया था, जादूगर सा जादू चलाते हैं, संस्था की महाराष्ट्र इकाई को कितना आगे ले जाते हैं, यही देखना है |अध्यक्ष नियुक्त कर संस्था गौरवान्वित है |
     प्रिय देवेन्द्र जी और प्रफुल्ल जी को वहीं छोड़ कर हम ऋषिकेश की ओर बढ़ गये, रामझूला के आगे चोटीवाला रेस्टोरेन्ट में खाना खाया, समयाभाव के कारण उस रमणीक स्थान से वापस लौटना पड़ा, और घर की ओर चल दिया|रास्ते भर नोकझोंक के साथ हँसीमजाक करते हुए हम सब मुरादाबाद पहुँचे, जहाँ आ. रश्मि जी के अनुरोध पर उनके घर पहुँचे चाय नाश्ता किया, दोनों बच्चियों सहजल और सिद्धि से मिला, बच्चे दोनों बहुत प्यारे लगे|शीघ्र ही रश्मि जी से विदा ले आगे बढ़ा,प्रफुल्ल जी भी रास्ते में थे, देवेन्द्र चौधरी जी वहीं रुके थे क्योंकि उन्हें अगले दिन जाना था|अर्धरात्रि में निज निवास स्थान पर पहुँचा, सबको छोड़ते हुए, कार खड़ी करके मैं और आलोक अपने अपने घर की ओर बढ़े |

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दिलीप कुमार पाठक "सरस"

Sunday, 13 October 2019

पक्षी प्रेम (आत्ममंथन)

     आत्ममंथन

रात को दूध लेने मदर डेयरी पहुंचा तो दूध खत्म हो चुका था थोड़ा जल्दी का अलार्म लगाया सोचा कल जल्दी नित्यकर्म निपटा कर दूध ले आऊंगा क्योंकि 9:00 बजे तक मरम्मत कार्य हेतु मिस्त्री को आना था, सुबह उठकर दूध ले आया और प्रभात का आनंद लेने छत पर पहुंचा नवरातों के सुंदर भोर शीतल पवन के झोंके शरीर और मन को आनंदित कर रहे थे इन दिनों में प्रकृति अपनी समान अवस्था में होती है ना गर्मी की तपन ना जाड़े की ठिठुरन ! इस सुबह में एक प्यारा अहसास था चारों ओर शांति ताजगी और पंछियों की चहचहाहट और अचानक ! एक चिड़िया मेरे छत की मुंडेर पर रखे पानी के कसोरे के पास आकर बैठ गई बड़ी उत्सुकता से कूदकर कसोरे पर चढ़ी पर शायद पानी ना होने के कारण इधर-उधर झांककर मेरी ओर आशा भरी निगाहों से देखा मानो पूछ रही हो इतना तो कर सकते हो हमारे लिए पानी तो मोल नहीं आता तुम भी तो इतना व्यर्थ करते हो|
    घर पर मरम्मत के चलते पिछले दिन पानी डालना शायद भूल गया था नन्ही चिड़िया कि वह नजरें मुझे अपराधिक सा महसूस करा रही थी एक अजीब सा पश्चाताप मुझे झकझोर गया ! हम किसी को कुछ देने वाले कौन हैं देता तो ईश्वर ही है पर हमें निमित्त तो बनाया है उसने तो क्यों अपने कर्तव्य को ठीक से नहीं समझा, मेरा आज देर से उठना मुझे अपराध बोध का आभास करा रहा था, ना जाने कितने पंछी  आकर लौट जाते होंगे भोर में क्योंकि वह हमारी तरह 7:00 बजे नहीं उठते पार्कों में कितने ही व्यक्ति चिड़ियों को दाना डालते हैं पर शायद किसी ज्योतिषी या पंडित के कहने पर या अपने ग्रह ठीक करने या पुण्य कमाने के लिए पर क्या किसी ने देखी होगी नन्ही चिड़िया की प्रश्नवाचक  दृष्टि ??
जो हमसे कुछ अपेक्षाएँ रखती है|  

                 ~ सुबोध कुमार


Subodh kumar
Delhi
I m estate agent by profession
& writer by passion
  Book writen- -  मेरे मन के गांव में ( कविता संग्रह)

Sunday, 6 October 2019

नवरात्रि के पावन अवसर पर माता के आशीर्वाद स्वरूप कुछ दोहे साहिल की कलम से (06/10/2019)

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             दोहे

माता  की  किरपा  रहे, सभी  करे  गुणगान |
कष्ट हरण संबल मिले, हो जीवन सुख मान||

नवदुर्गा  की  शक्ति से, असुर  गये सब हार|
शक्ति साधना से हटे, विकल कष्ट का भार||

मन मन्दिर को साध लो, नत मस्तक हो शीश|
भव  बंधन  माता  हरे, मिले  स्नेह  आशीष||

कंटक  पथ  सुन्दर बने, सब  में हो  सहकार|
माँ  वरदा  आशीष  से, भव  बंधन  हो पार||

माँ  दुर्गा  आशीष  से,  हो  जीवन  आसान|
तेजवीर  रवि  तेज से, मिले  धवल वरदान||

© डॉ० राहुल शुक्ल साहिल






पत्तल दोना परई (सकोरा) व मिट्टी के बर्तन व गिलास में भोजन करने व पानी पीने के वैज्ञानिक लाभ


आओ जाने पत्तल- परई (सकोरा) व मिट्टी के गिलास में भोजन करने के  वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक लाभ — —
पत्तलों की परंपरा अद्वितीय है इसे फिर से अपनाएँ ... अब तो जर्मनी और ब्रिटेन भी हरे पत्तों की प्लेट बना रहा है! ००००००
पत्तल में भोजन के अद्भुत लाभ...
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में 2000 से अधिक वनस्पतियों की पत्तियों से तैयार किये जाने वाले पत्तलों और उनसे होने वाले लाभों के विषय में पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान उपलब्ध है पर मुश्किल से पाँच प्रकार की वनस्पतियों का प्रयोग हम अपनी दिनचर्या में करते है।
आम तौर पर केले की पत्तियों में खाना परोसा जाता है। प्राचीन ग्रंथों में केले की पत्तियों पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है। आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियों का यह प्रयोग होने लगा है।
सुपारी के पत्तों से बनाई गई प्लेट, कटोरी व ट्रे, जिनमें भोजन करना स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक है।
जिसे प्लास्टिक, थर्माकोल के ऑप्शन में उतरा गया है क्योंकि थर्माकोल व प्लास्टिक के उपयोग से स्वास्थ्य को बहुत हानि भी पहुँच रही है ।

#_सुपारी के पत्तों यह पत्तल केरला में बनाई जा रही हैं और कीमत भी ज्यादा नही, तक़रीबन 1.5, 2, रुपये साइज और क्वांटिटी के हिसाब से अलग अलग है।
#_पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
#_केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है।
#रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है। पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी इसका उपयोग होता है। आम तौर पर लाल फूलो वाले पलाश को हम जानते हैं पर सफेद फूलों वाला पलाश भी उपलब्ध है। इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासीर (पाइल्स) के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है।
#_जोड़ो के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल उपयोगी माना जाता है। पुरानी पत्तियों को नयी पत्तियों की तुलना मे अधिक उपयोगी माना जाता है।
#_लकवा (पैरालिसिस) होने पर अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलों को उपयोगी माना जाता है।
पत्तलों से अन्य लाभ :
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है।
2. न पानी नष्ट होगा।
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा।
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे l
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी।
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी।
7. प्रदूषण भी घटेगा।
8. सबसे महत्वपूर्ण झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है, एवं मिटटी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है।
9. पत्तल बनाने वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा।
10. सबसे मुख्य लाभ, आप नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा। जो जल प्रदूषण में आपको सहयोगी बनाता है।
सभी लोगों को भंडारे, विवाहोत्सव, जन्मोत्सव आदि भोज एवं अन्य शुभ उत्सवों एवं पार्टियों  में डिस्पोजल की जगह इन पत्तलों का प्रचलन करना चाहिए।
       धन्यवाद
                  संकलन~  डॉ० राहुल शुक्ल साहिल
                        संजीवनी वेलफेयर सोसाइटी,
                मिश्रा मार्केट, कालिन्दीपुरम चौकी के पास,
                         राजरूपपुर, प्रयागराज उ०प्र०

Monday, 16 September 2019

दोहा गज़ल़ [हिन्दी] ~ बोधनराम निषादराज "विनायक"





विषय - हिंदी
विधा - दोहा गज़ल
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हिन्द  देश  के  वासियों, हिंदी   मेरी  जान।
है ये तन  मन  देश  की, देश हेतु  कुर्बान।।

बोलो  वंदे   मातरम् , भारत   की  ये  राग,
भारत वासी हैं सभी ,सबकी  यही जुबान।
हिन्द देश के वासियों.............

अंग्रेजी  पढ़कर  कभी, मत  बनना  अंग्रेज,
देश  द्रोह  करना नहीं, हिन्द  हमारी  शान।
हिन्द देश के वासियों..............

राष्ट्र जागरण प्रेम की, अच्छा बनो मिशाल,
आज  दिखादो  साथियों, हिंदी  हिंदुस्तान।
हिन्द देश के वासियों,...............

भारत बहु भाषा रहे, फिर भी हम हैं एक,
जाँति पाँति में भिन्नता, भाषा  हिंद महान। 
हिन्द देश के वासियों................
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचनाकार :--
बोधन राम निषादराज "विनायक"
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम (छ.ग.)
All Rights Reserved@bodhanramnishad

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के संस्थापक दिलीप कुमार पाठक सरस जी का सन्देश



      जय जय 
      💓🙏🏻💓
कलमकार साथियों को सादर नमस्कार ~💓🙏🏻💓

दो शब्द 

आप सबकी गरिमामयी उपस्थिति  से जय जय हिन्दी गौरवान्वित है |आप सबको कोटिशः बधाई एवं शुभकामनाएँ|

एक सुझाव सभी रचनाकारों के बीच साझा करने का प्रयास मात्र ~

आप सभी साथियों से निवेदन है कि काव्य के अनेक तत्व होते हैं |काव्य विधा के अनेक भेद, उपभेद हैं| तो रचना लिखने के बाद और पटल पर प्रेषित करने से पहले~
1- एक बार रचना का अवलोकन स्वयं करें|
2- रचना का शीर्षक ही रचना को पहचान दिलाती है, रचना शीर्षक अंकित करें|
3- रचना काव्य की किस विधा में है, अंकित होगा तो पढ़ने में पाठक को आनंद आयेगा|
4-विधा का विधान अंकित होगा तो अन्य साथियों को सीखने का सुअवसर प्राप्त होगा|एक दूसरे से हम सभी सीखते हैं|
यदि हम रचनाकार हैं तो रचनाकार धर्म का पालन करना भी हमारा कर्तव्य होना चाहिए |
क्योंकि समाज एक अच्छे साहित्यकार से बहुत कुछ सीखता है|
आइए हम सब सीखने सिखाने की परम्परा को मजबूती प्रदान करें|
पुनः हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ सभी साथियों को |आप सबकी सक्रिय उपस्थिति से जय जय हिन्दी को शक्ति मिल रही है ,इस क्रम को और ऊर्जा प्रदान करें |
सस्नेह जय जय 
🌹🙏🏻🌹

दिलीप कुमार पाठक "सरस"
संस्थापक 
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत 
🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹


Wednesday, 11 September 2019

कौशल कुमार पाण्डेय आस (कवि परिचय)

                 कौशल कुमार पाण्डेय "आस"

आशुकवि आस जी का परिचय

आस सभी मुझको कहें, कौशल मेरा नाम।
है कटराबाजार बिच,बीसलपुर में धाम।।

सन सत्तावन पाँच दस,जन्मा था अप्रैल।
मिलूं सभी से नेह से,रखूँ न मन में मैल।।

जननी सावित्री भली,पालक थे जगदीश।
उनके चरणों में झुका,सदा आस का शीश।।

स्नातकोत्तर तक मैं पढा़,बढा़ ईश से प्रेम।
जप तप पूजन पाठ फिर, यह जीवन का नेम।।

मान और सम्मान में पाये बहुत प्रमाण।
हृदय सुकोमल ही रहा,हुआ नहीं पाषाण।।

जय जय हिन्दी पटल का,होवे खूब विकास।
संरक्षक हूँ ट्रस्ट का,मेरा यही प्रयास।।

सृजन और साहित्य से,मुझे बहुत है प्यार।
आप सभी मिल कर करें, इसका खूब प्रसार।।

यह जय जय परिवार है,आप सभी हैं अंग।
मिलजुल कर हम सब रहें,अमर बने यह संग।।

अभिनंदन वंदन करूँ, करता सबसे आस।
जय जय चमके सूर्य सम,सबका रहे प्रयास।।
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कौशल कुमार पाण्डेय 
आस" बीसलपुरी।।      
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परिचय मेरा लो पढो़, बीसलपुर  है  धाम।
'आस' सभी कहते मुझे, 'कौशल' मेरा नाम।।

जननी  सावित्री बनी, पालक थे जगदीश।
स्नातकोत्तर तक पढा़, ध्यायूँ प्रतिपल ईश।।

सेवाभाव हृदय भरा, साहित्यक यह चित्त।
ईश प्रेम  में डूबकर, चाहा कभी न वित्त।।

मान  और  सम्मान में, पाये बहुत  प्रमाण।
सुख-दुख कानन जन्म यह, हृदय नहीं पाषाण।।

संरक्षक  पद  को  लिये, करता  इतनी  आस।
शोभित जय जय पटल हो, करिये सभी प्रयास।।

अभिनंदन वंदन मेरा, करना सब स्वीकार।
यत्न  करो  ऐसा सभी, होवे  पटल  प्रसार।।
_________________
कौशल कुमार पाण्डेय
आस"बीसलपुरी।       

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Tuesday, 10 September 2019

गीत ~अपनों से हम दूर हो गए ~ डॉ० आदेश कुमार पंकज

एक गीत
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अपनों से हम दूर हो गये ।
सपने सब काफूर हो गये ।।
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चलते - चलते कहाँ गये हम ।
मुझको दिखता भ्रम ही भ्रम ।।
अन्त हीन मंजिल को पायें ,
मंजिल से हम दूर हो गये ।।
सपने सब काफूर हो गये ।।
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तिल तिल जोड़ा नीड़ बनाया ।
निस दिन अपना स्वेद बहाया ।।
जिनको अंक बिठाया मैनें ,
वे ही अब मगरूर हो गये ।।
सपने सब काफूर हो गये ।।
****************************
आस्तीन में पाला जिनको ।
दूध पिलाकर पोषा उनको ।।
जहर उगलते पल पल वो ,
जाने कितने क्रूर हो गये ।।
सपने सब काफूर हो गये ।।
****************************
जिनको सच का पाठ पढ़ाया ।
जिनके खातिर बदन गलाया ।।
झूठ के संग चलते वे अब ,
नयन मूँद कर सूर हो गये ।।
सपने सब काफूर हो गये ।।
****************************
घाव पुराना भूला हम ने ।
प्रेम लुटाया उन पे हमने ।।
सारे मरहम नाकाम हुये,
वे ही अब नासूर  हो गये ।।
सपने सब काफूर हो गये ।।
****************************
बदल गया आमों का मौसम ।
बदला जीवन मेरे हम - दम ।।
पंकज सारे परिवर्तन यह ,
हमको अब मंजूर हो गये ।।
सपने सब काफूर हो गये ।।
****************************
डॉ. आदेश कुमार पंकज


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कवि परिचय
             ......................................
 साहित्यिक नाम- डॉ.आदेश कुमार पंकज
मूल नाम --- डॉ. आदेश कुमार गुप्ता
माता  का नाम - स्व. श्री मती पुष्पावती गुप्ता
पिता का नाम - स्व. श्री किशोरी लाल गुप्ता
सहचरी का नाम- श्री मती शिखा गुप्ता एम.ए.बी.एड.
जन्म तिथि - 30.06.1963
व्हाट्स ऐप नं०- 9140189159 , 9455567981
शैक्षिक योग्यता -एम.ए. ( अर्थशास्त्र )एम.एस-सी ( गणित शास्त्र ) बी.एड. डाक्टरेट मानद उपाधि
साहित्यिक उपलब्धियाँ -करीब 400 से अधिक पत्र पत्रिकाओं मेंं बाल कविताएं,बाल कहानियाँ तथा अन्य कविताएं प्रकाशित।
आकाशवाणी लखनऊ से बच्चों के द्वारा मेरी बाल कविताओं का वाचन किया गया ।
विभिन्न वेवसाइटों पर रचनाएँ प्रसारित --- रचनाकार .कॉम , काव्यसागर .कॉम ,हिन्दी भाषा .काँम ,अ.भा.सा.प.कॉम स्टार हिन्दी .कॉम ,कागज दिल.कॉम ,पुष्प वाटिका.कॉम ,स्टोरी मिरर.कॉम , कागज दिल .कॉम ,हम हिन्दुस्तानी .कॉम ,डाटला एक्सप्रेस .कम ,सूर्या न्यूज .कॉम, हिन्दी गीरी.काँम , कविता बहार.कॉम, दैनिक टू टाइम्स .कॉम ,जनभाषा हिन्दी .कॉम आदि
ई.पत्रिका अटल गुंजन, गजल गुंजन, अटल सूर्य, राष्ट्र  गूँज, आदिका, साहित्य साधना  आदि में प्रकाशित ।
हमारे ब्लाग --- अर्णव , नन्हीं कलम ।
पचास से अधिक साहित्यिक समूहों से सम्बन्ध ।
कवि सम्मेलनों में अध्यक्षता का सौभाग्य तथा सम्मान ।
पत्रिकाएँ .. अमर ज्योति हिसार ,चेतना स्रोत लखनऊ, सन बीम सोनभद्र, पुष्प वाटिका पटना, अर्बाबे कलम, संगम स्मारिका हितैषी दूत कानपुर, आदर्श कौमुदी बिजनौर, स्वर्ण  आभा, युग प्रर्वतक आदि
साझा काव्य संग्रह ----  दोहा कलश, कस्तूरी कंचन, नूर ए गजल, कविता अनवरत, काव्य कलश, अनकहे अहसास, काव्य रंगोली, अटल सूर्य, अमर ज्योति हिसार, आदिता, यादें आदि ।
।।।।।।।।। सम्मान ।।।।।।।।।
1. वैश्य श्री सम्मान,शाहजहाँपुर वर्ष 1992
2. काव्य रत्न सम्मान प्रयाग सेवा समिति उत्तर प्रदेश 2000
3.निर्धन सहायता प्रमाण पत्र  ..  हेल्पेज इंडिया ,भारत सरकार 2003
4.सर्वोत्तम वक्ता गणित शास्त्र .. हिंडाल्को रेणुसागर रेणुकूट उत्तर प्रदेश 2004
5. स्पेक्टरा सम्मान . ए.बी.पी.एस. सोनभद्र उत्तर प्रदेश 2005
6.धरा सम्मान ... उत्तर प्रदेश सरकार 2005
7.सर्वोत्तम अध्यापक गणित शास्त्र  ..सी.बी.एस.ई. नयी दिल्ली 2006
8.स्वच्छता सम्मान ..हिंडाल्को रेणुसागर ,सोनभद्र उत्तर प्रदेश 2008
9.सर्वोत्तम पहल सम्मान .. प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड उत्तर प्रदेश 2008
10.अंतरराष्टीय गणित सम्मान  ..विज्ञान ओलियमपियाड फाउन्डेशन 2011
11.अंतरराष्टीय गणित सम्मान  ... गणित संस्थान भारत 2013
12.सर्वोत्तम गणित माडल सम्मान  .. सी.बी.एस.ई.नयी दिल्ली 2014
13.श्रेष्ठ अध्यापक द्वारा  श्री मती स्मृति ईरानी जी शिक्षा मंत्री भारत सरकार  वर्ष 2014
14.काव्य कलश सम्मान  ..अनुराधा प्रकाशन नयी दिल्ली 2017
15. आगमन सम्मान . आगमन साहित्यिक संस्था दिल्ली वर्ष 2017
16.हिन्दी साहित्य सेवी सम्मान .. विश्व हिन्दी रचनाकार मंच, भोपाल  वर्ष 2017
17. प्रतिज्ञा सम्मान भारत सरकार.. भारत सरकार     वर्ष 2017
18. दोहा शतकवीर कलम की सुगंध सम्मान - २०१८, कलम की सुगंध नयी दिल्ली
19.भक्ति गौरव सम्मान..साहित्य संगम संस्थान दिल्ली वर्ष 2018
20.श्रेष्ठ टिप्पणी कार सम्मान (दो बार ) .. साहित्य संगम संस्थान ,इंदौर वर्ष 2018
21. दोहा अंताक्षरी प्रतियोगिता में द्वितीय व तृतीय पुरस्कार साहित्य संगम संस्थान दिल्ली
 22. काव्य मार्तण्ड सम्मान . साहित्य संस्थान ,भोपाल वर्ष 2018
 23. हिन्द वीर सम्मान .. साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली वर्ष 2018
24.आशु सृजन दोहाकार ( पाँच बार ) ... अर्णव कलश एसोसिएसन हरियाणा वर्ष 2018
25.विश्व वानिकी दिवस पर सहभागिता सम्मान . साहित्य समिति भोपाल वर्ष 2018
26.रोला शतकवीर सम्मान - 2018.. कलम की सुगंध नयी दिल्ली
27.दोहा विज्ञ सम्मान .. साहित्य संगम संस्थान दिल्ली वर्ष 2018
28.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान...कलम की सुगंध दिल्ली वर्ष 2018
29.पर्यावरण चेतना सम्मान .... पर्यावरण संस्थान नयी दिल्ली वर्ष 2018
30.क्षेत्रीय बोली गौरव सम्मान।.साहित्य संगम संस्थान भोपाल वर्ष 2018
31.अवैतनिक संवाददाता साहित्य संगम समाचार पत्र  वर्ष 2018
32. नई सदी का अभिमान सम्मान पत्र . साहित्य संगम इंदौर वर्ष 2018
33. श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान चार बार... कलम की सुगंध दिल्ली वर्ष 2018
34. साहित्य गौरव सम्मान - 2018 .. साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली3
35. दीप ज्योति सम्मान .. साहित्य संगम संस्थान  वर्ष 2018
36.क्षेत्रीय बोली गौरव सम्मान ..... खड़ी बोली हिन्दी वर्ष 2018
37.त्वरित दोहा लेखन सम्मान ..... द्वितीय स्थान  वर्ष 2018
38.दैनिक श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान ... अटल काव्याजलि मंच,रीवा वर्ष 2018
39.दोहा प्रतियोगिता प्रशस्ति पत्र .... अटल काव्यांजलि मंच , वर्ष 2018
40.प्रशस्ति पत्र ...... साहित्य अर्पण ... एक पहल ,जयपुर राजस्थान वर्ष 2018
41.सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान ... भावों के मोती द्वारा प्रदत्त, उड़ीसा वर्ष 2018
42.काव्य कलम सम्मान ...  कलम की सुगंध दिल्ली वर्ष   2018
43.आशु दोहाकार सम्मान ... कलम की सुगंध दिल्ली वर्ष 2018
44.मनहरण घनाक्षरी शतकवीर सम्मान ... अर्णव कलश एसोसियेशन हरियाणा वर्ष 2018
45.मुक्तक शतकवीर सम्मान ... अर्णव कलश एसोसियेशन,हरियाणा वर्ष 2018
46.साहित्य गौरव सम्मान ... मधुशाला साहित्यिक परिवार , उदयपुर वर्ष 2018
47.आशु दोहा सृजन सम्मान --- 2018 -- कलम की सुगंध ,नयी दिल्ली
48.गीता जागृति सम्मान --- अर्णव कलश एसोसिएशन,हरियाणा वर्ष 2018
49.साहित्य रत्न सम्मान - 2018 --- मधुशाला साहित्यिक परिवार उदयपुर राजस्थान
50. आंचलिक साहित्यकार गौरव --- साहित्य संगम बोली विकास मंच, इंदौर वर्ष 2018
51.साहित्य सारथी सम्मान .. 2018  .. अखिल भारतीय साहित्य परिषद विराट नगर राजस्थान
52.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान --- साहित्य संगम संस्थान दिल्ली वर्ष 2018
53.अटल दीप सम्मान - अटल काव्यांजलि मंच ,रीवा मध्य प्रदेश वर्ष 2018
54. गजल प्रवीण सम्मान -2018 --महफिल ..ए..गजल हरियाणा
55. छन्द सम्मान .... कलम की सुगन्ध ,नयी दिल्ली वर्ष 2018
56.काव्य सेतु सम्मान ... साहित्य संगम संस्थान दिल्ली वर्ष 2018
57. नूतन साहित्य कुंज द्वारा प्रशस्ति पत्र वर्ष 2018
58.स्टार साहित्यकार सम्मान --2019 -- कवि चौपाल व स्टार हिंदी ब्लाग राजस्थान
59.काव्य कुन्दन सम्मान - 2019 साहित्य संगम संस्थान दिल्ली
60.उत्तम दोहा सृजन सम्मान- 2019 कलम की सुगंध नयी दिल्ली
61.चौपाई शतकवीर कलम की सुगंध सम्मान 2019 --अर्णव कलश एसोसिएसन हरियाणा
62.साहित्य श्री - 2019 मधुशाला साहित्यिक परिवार उदयपुर राजस्थान
63.साहित्य कदम्ब -- 2019 साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली
64. चित्र चिंतन सम्मान 2019 --हमारे अपने कलमकार गुजरात
65.गीत सम्मान 2019 --हमारे अपने कलमकार गुजरात
66. अटल साहित्य रत्न सम्मान 2019 - अटल काव्याँजलि सतना मध्य प्रदेश
67. कवि चौपाल मनीषी सम्मान 2019 --राष्टीय कवि चौपाल दौसा राजस्थान
68.सर्वश्रेष्ठ सम्मान 2019 -अ.भा.सा.परिषद जयपुर राजस्थान
69.सर्वोत्तम गीत सम्मान 2019 -हमारे अपने कलमकार गुजरात
70. बसंत छंद काव्य कलम सम्मान 2019 -अर्णव कलस एसोसिएसन हरियाणा
71.साहित्य सृजक सम्मान 2019 -शिवेतरक्षिति साहित्य सृजन मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
72.साहित्य रत्न सम्मान 2019--शिवेतरक्षिति सृजन मंच अवध प्रांत उत्तर प्रदेश
73.गीत सम्मान 2019 -हमारे अपने कलमकार गुजरात
74.दोहा विज्ञ सम्मान 2019 - साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली
75. काव्य सृजन सम्मान 2019 -हमारे अपने कलमकार गुजरात
76.रामेश्वर दयाल दुबे साहित्य सम्मान 2019 -कवि चौपाल मैनपुरी उत्तर प्रदेश
77.फणीश्वर नाथ रेणु सम्मान 2019 -साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली
78.साहित्य सृजक सम्मान 2019 शिवेतरक्षति मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
79.साहित्य सृजक सम्मान 2019 शिवेतरक्षति मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
80.दोहा विज्ञ सम्मान 2019 साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली
81.नीलकण्ठ सम्मान 2019 साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली
82. अटल जन्मोत्सव सम्मान 2019 अटल मंच सतना मध्य प्रदेश
83.गीतकार सम्मान 2019 हमारे अपने कलमकार गुजरात
84. श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान 2019 -अटल काव्यांजलि मंच सतना मध्य प्रदेश
85.सम्मान पत्र 2019 हिन्दी साहित्य मंच प्रयागराज
86.काव्य दिग्गज अलंकरण 2019 -मधुशाला परिवार उदयपुर राजस्थान
87.प्रहलाद अनुराग सम्मान 2019 -विश्व जन चेतना मंच बरेली उत्तर प्रदेश
88.प्रेम भूषण सम्मान 2019 -अटल काव्याजलि मंच सतना मध्य प्रदेश
89.संगम स्वरांजलि सम्मान 2019 -साहित्य संगम संस्थान दिल्ली
90.सतरंगी सम्मान 2019 -साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली
91.साहित्य रत्न 2019 -शिवेतिरक्षति मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
92.रचनाकार शब्द साधक सम्मान -- रचनाकार मंच नयी दिल्ली
93.अटल काव्य सम्मान - अटल काव्यांजलि मंच सतना मध्य प्रदेश
94.क्षेत्रीय रत्न सम्मान - बोली विकास मंच नयी दिल्ली
95.साहित्य सम्राट सम्मान - अ.भा.साहित्य परिषद विराटनगर राजस्थान
96.अवध गौरव भारती सम्मान - शिवेतरक्षति मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
97.नव दुर्गे काव्य रत्न सम्मान - अटल काव्यांजलि मंच सतना मध्य प्रदेश
98.सर्वश्रेष्ठ गीत सम्मान - हमारे अपने कलमकार गुजरात
99.परमवीर साहित्य रत्न - शिवेतरक्षति मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
100.हिन्दी सम्मान -- हिन्दी साहित्य मंच प्रयागराज
101.साहित्य रत्न 2019 - रा.उ.मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
102.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान - अटल कावव्यांजलि मंच सतना
103.काव्य भूषण सम्मान -मधुशाला साहित्यिक परिवार उदयपुर
104.अटल काव्य रत्न सम्मान - अटल काव्यांजलि मंच सतना मध्य प्रदेश
105.सोंधी माटी काव्य दिग्गज सम्मान - आंचलिक बोली संर्वधन मंच बाराबंकी
106. श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान - अटल काव्यांजलि मंच सतना मध्य प्रदेश
107.राष्टृ भाषा सम्मान - हिन्दी भाषा .काँम इन्दौर मध्य प्रदेश
108.दोहाकार सम्मान - दोहाशाला साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली
109.दोहा सिद्ध सम्मान -शिव शक्ति दोहा मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
110.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान -अटल काव्यांजलि मंच सतना मध्य प्रदेश
111.बोली सुमेरु सम्मान - बोली विकास मंच नयी दिल्ली
112.जय माँ हिन्दी सम्मान - हिन्दी साहित्य मंच पटना बिहार
113.श्रवण कुमार सम्मान - गीत शाला मंच इन्दौर मध्य प्रदेश
114. दोहा सिद्ध सम्मान - दोहा सृजन मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
115.मातृ शक्ति सम्मान - विश्व जनचेतना टृस्ट  पीलीभीत उत्तर प्रदेश
116.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान - दोहाशाला मंच इन्दौर मध्य प्रदेश
117.दोहा मुक्तक सम्मान - दोहाशाला मंच इन्दौर मध्य प्रदेश
118.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान - दोहाशाला मंच इंदौर मध्य प्रदेश
119.श्रेष्ठ दोहा मुक्तक सम्मान - दोहाशाला मंच इंदौर मध्य प्रदेश
120.दोहा साधक सम्मान - रचनाकार मंच नयी दिल्ली
121.पर्यावरण मित्र सम्मान - कविता बहार जयपुर राजस्थान
122. मायड़ बोली रत्न सम्मान - बोली विकास मंच नयी दिल्ली
123.श्रेष्ठ समीक्षक सम्मान -युगधारा फाउन्डेशन लखनऊ उत्तर प्रदेश
124.श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान - अटल काव्यान्जलि समूह सतना मध्य प्रदेश
125.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान - अटल काव्यांजलि साहित्यिक समूह सतना मध्य प्रदेश
126.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान - दोहाशाला साहित्य संगम नयी दिल्ली
127.कवि सम्मेलन सम्मान - हिन्दी साहित्य मंच पटना बिहार
128.पर्यावरण चेतना सम्मान - अटल साहित्यिक मंच सतना मध्य प्रदेश
129.दोहा भूषण सम्मान - दोहाशाला मंच इंदौर मध्य प्रदेश
130.शिव पूजन सहाय सम्मान -बोली विकास मंच नयी दिल्ली
131.लिटरेरी कैपटन सम्मान -स्टोरी मिरर मुम्बई
132.दोहा भूषण सम्मान - दोहाशाला मंच नयी दिल्ली
133.मधुशाला वृक्ष मित्र सम्मान -मधुशाला साहित्यिक परिवार उदयपुर राजस्थान
134.पर्यावरण चेतना सम्मान - रचनाकार चक्रधरपुर बिहार
135.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान -अटल साहित्यिक परिवार सतना मध्य प्रदेश
136.अटल भूषण सम्मान -अटल साहित्यिक परिवार सतना मध्य प्रदेश
137.श्रेष्ठ चौपाई छन्द सृजक सम्मान -अटल काव्यांजलि साहित्यिक समूह सतना मध्य प्रदेश
138.दोहा भूषण सम्मान -दोहाशाला मंच नयी दिल्ली
139.भगवती प्रसाद वर्मा सम्मान -बोली विकास मंच नयी दिल्ली
140.श्रेष्ठ कवि सम्मान - हमारे अपने कलमकार उत्तर प्रदेश
141.दोहा श्री सम्मान - कलम की सुगंध हरियाणा
142. साहित्य सृजक सम्मान -राष्टीय शिव शक्ति मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
143.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान -अटल काव्यांजलि मंच सतना मध्य प्रदेश
144.काव्य साधना सम्मान -अटल साहित्यिक मंच सतना मध्य प्रदेश
145.उन्मुक्त सम्मान - विश्व चेतना मंच बरेली उत्तर प्रदेश
146.राष्टृ प्रेमी सम्मान - मधुशाला साहित्यिक परिवार उदयपुर राजस्थान
147.दिनकर सम्मान - शिवशक्ति उन्नयन मंच बाराबंकी उत्तर प्रदेश
148.श्रेष्ठ चौपाई छंद सृजक सम्मान -अटल काव्यांजलि साहित्यिक परिवार सतना मध्य प्रदेश
149.दोहा साधक सम्मान -रचनाकार मंच चक्रधर पुर झारखण्ड
150.श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान - अटल साहित्यिक परिवार सतना मध्य प्रदेश
151.सोम साधना मृत सम्मान -साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली
152.जय हिंद सम्मान - साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली
153.हिन्द चेतना सम्मान -अटल साहित्यिक परिवार सतना मध्य प्रदेश
154.श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान -राष्टीय आंचलिक संस्थान झझ्जर हरियाणा
155.डाक्टरेट उपाधि सम्मान - वर्तमान अंकुर नोएडा उत्तर प्रदेश
156.हिन्दी साहित्य समृद्धि रत्न सम्मान -हिन्दी साहित्य समृद्धि मंच मुजफ्फरपुर बिहार
157.दोहा विज्ञ सम्मान -रचनाकार मंच नयी दिल्ली
158.बोली उन्नयन सम्मान - साहित्य संगम संस्थान नयी दिल्ली
159.श्रेष्ठ संचालक -कलम की सुगंध हरियाणा
160.श्रेष्ठ कवि सम्मान -हिन्दी साहित्य मंच व कलम लाइव राजस्थान
161.गुरु गोविन्द सम्मान -साहित्य संगम संस्थान दिल्ली
162.कलम शिक्षा सम्मान -कलम की सुगंध हरियाणा
163.साहित्य साधना सम्मान - साहित्य साधना मंच बदायूँ उत्तर प्रदेश
164.सर्वश्रेष्ठ पथ प्रर्दशक सम्मान - रा. आंचलिक साहित्य संस्थान झझ्जर हरियाणा
165.जय जय सम्मान - विश्व चेतना मंच पीलीभीत उत्तर प्रदेश
166.साहित्य सृजक सम्मान - साहित्य समृद्धि मंच मुजफ्फरपुर बिहार
167.श्रेष्ठ कलमकार सम्मान - हमारे कलमकार उत्तर प्रदेश
168.श्रेष्ठ कलमकार सम्मान - हमारे कलमकार उत्तर प्रदेश
169.कलम सृजन सम्मान - अर्णव कलश एसोसिएसन हरियाणा
170.काव्य विभूषण सम्मान - अखिल भारतीय साहित्य परिषद मालवा प्रांत इन्दौर मध्य प्रदेश

आदि कवि सम्मेलनों में अन्य सम्मानों से सम्मानित ।
आत्म कथ्यः- मैं आदेश कुमार गुप्ता पंकज सभी महानुभावों को अवगत कराना चाहूँगा कि मेरा जन्म शाहजहाँपुर के एक मध्यम वर्गीय सम्भ्रान्त परिवार में हुआ ।मैं एक मध्यम श्रेणी का छात्र रहा परन्तु आप लोगों की दुआओं से एक श्रेष्ठ अध्यापक के रुप में स्थापित हुआ ।काव्य के प्रति रुझान होते हुए भी मैनें स्नातक स्तर पर आने के बाद लिखना प्रारम्भ किया ।मैनें बाल कहानियाँ ,बाल कविताएँ ,गीत ,गजल , रोला दोहा, दोहा मुक्तक , दोहा गजल सोरठा ,घनाक्षरी ,मुक्तक ,हाइकु ,तांका क्षणिकायें तथा हास्य रस की कवितायें लिखीं ।

पूरा पता- डॉ. आदेश कुमार पंकज 
विभागाध्यक्ष गणित शास्त्र
रेणुसागर सोनभद्र
उत्तर प्रदेश पिनः - 231218
ईमेल ~~
adeshpankaj@gmail.com





Monday, 9 September 2019

इन्द्रव्रजा छन्द (दिलीप कुमार पाठक सरस जी)

             इन्दवज्रा छंद

विधान ~ तगण,तगण,जगण,गुरु गुरु]
             (221 ,221, 121, 22)
११वर्ण,४चरण,२-२ समतुकांत]

राधा~
नैनों सजाये रसना रटाये|
राधा बुलाये रटना लगाये||
ओ साँवरे मोहन धाय आओ|
आँसू बहें पोछ गले लगाओ||

कृष्ण ~
वंशी सजायी अधरों लगायी|
आयी न तू क्यों धुन वो बजायी||
बैठा रहा मैं यमुना किनारे|
राधा सु राधा हम टेर हारे||

राधा ~
काँटे चुभे पैरन वेदना पी|
दौड़ी सुनी जो धुन मोहना जी||
मेरे कन्हैया सुध भूल भागी|
 हाँ चेतना मैं पथ माहिं त्यागी||

कृष्ण ~
रोता रहा हूँ छलकात नैना|
ले नाम राधा पुलकात बैना||
मैं हूँ तुम्हारा तुम हो हमारी|
हो मोहिनी-सी मम प्राण प्यारी||

राधा~
हारी थकी थी सब दर्द खींचा|
आ मोहना ने जब अंक भींचा||
सींचा सदा नेह दुलार बोला|
छायी खुशी नैनन प्यार डोला|


🖊🖊🖊🖊🖊🖊🖊🖊
दिलीप कुमार पाठक "सरस"

चौपाई छन्द (समुद्र-वार्ता) ~ दिलीप कुमार पाठक सरस जी

                 विधा~चौपाई
                   समुद्र-वार्ता

गुरुचरणों में नमन हमारा|जग में गुरु है एक सहारा||
मात पिता गुरु तीनों देवा| करके सेवा पाओ मेवा||

भोरकाल आनंद समाना|टहलें मिल सब सहज सुजाना||
तुरत मित्र मंडली बुलाई|एक दिना यह बात चलाई||

सब मिल पहुँचे सागर तीरा| ऊँचा नीचा जल गंभीरा||
सागर तट पर आयें जायें|लहरें मन को बहुत लुभायें||

आसमान सूरज मुस्काते|धीरे-धीरे तपन बढ़ाते||
सूखे मुख ने माँगा पानी|प्यास हृदय की हुई सयानी||

सागर-जल कितना है खारा|समझ रहा सब हृदय हमारा ||
हे रत्नाकर उदधि शरीरा| खारे जल से मिटे न पीरा||

माना हृदय अथाह तुम्हारा|नमक दमक सह व्यर्थ किनारा||
जल के राजा हमें बताना|खारे जल का कौन ठिकाना||

नदियाँ नहरें कूप तड़ागा|मीठा जल सब आता भागा||
हमें बताओ कहाँ छुपाते|कैसे खुद की प्यास बुझाते||

शंख सीप सब जीव सहारे|सबने ही नित चरण पखारे||
कहो कौन इनका है दाता|दाता मम नहिं प्यास बुझाता||

सागर बोला बात सुनो तुम|बात सार को आज गुनो तुम||
जिस जल से तुम प्यास बुझाते|
वह जल कहो कहाँ से पाते||

मेघा छाते काले काले, भरतीं नदियाँ नहरें नाले||
पहले सूरज है झुलसाता |धीरे धीरे ताप बढ़ाता||

भाप बनाकर मम रस खींचा|खुद को आँसू से है सींचा||
तरह तरह के जहर मिले हैं|सब कुछ पीकर अधर सिले हैं||

मानव ने मल मूत्र बहाया|कृमि मारक विष खूब पिलाया||
माना मैंने मैं खारा हूँ|केवल मानव से हारा हूँ ||

भाप बना मैं ही बरसा हूँ|प्यासा केवल खुद तरसा हूँ||
नमक बना मम सूखा ढाँचा|स्वाद बढ़ा जिह्वा पर नाचा||

फिर भी मैं ही हूँ आरोपी|उछली जब तब मेरी टोपी||
जल की कीमत समझो भाई|जल बिन जीवन है दुखदाई||

जहर पिया अरु नमक बनाया|चख चख व्यंजन तुमने खाया||
मत नापो मेरी गहराई|जग है ईश्वर की प्रभुताई||

🖊🖊🖊🖊🖊🖊🖊🖊
दिलीप कुमार पाठक "सरस"

शिव छन्द (राम - राम)

🍁🎊 शिव छंद 🎊🍁         चार चरण प्रति चरण ११ मात्राएं, ३,६,९, वीं मात्रा लघु | दो-दो चरण सम तुकांत , आवश्यकतानुसार गुरु को २ लघु में लिख स...