Tuesday, 31 January 2023

शिव छन्द (राम - राम)

🍁🎊 शिव छंद 🎊🍁
       
चार चरण प्रति चरण ११ मात्राएं,
३,६,९, वीं मात्रा लघु | दो-दो चरण
सम तुकांत , आवश्यकतानुसार
गुरु को २ लघु में लिख सकते हैं||

   २१२  १२१  २

राम नाम  मानिए|
प्रीत रीत जानिए||
प्रेम  राग  बोलिए|
बंद  द्वार खोलिए||

काम  क्रोध  छोड़िए|
भक्ति भाव  जोड़िए||
नित्य  ही  भजूँ  तुझे|
आप  में   रखो  मुझे||

आप  ही  उदार  हो|
सृष्टि  की पुकार हो||
संग   साथ    गाइए|
पाणि  माथ   पाइए||

देव   रूप   है  अजर|
जीव  हो  सही डगर||
जन्म मृत्यु का न डर|
राम नाम   है  अमर||

धीर   वीरता   भरो|
पीर  दीन  की  हरो||
लोभ  मोह  भी तजूँ|
राम - राम  ही  भजूँ||

©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल

Tuesday, 7 July 2020

"मुहब्ब़त में धोखा खाया इंसान कभी- कभी आत्महत्या तक के ख्याल में जाकर दुखद अवसाद में चला जाता है, गीत के माध्यम से जीने की चाह जगाने का प्रयास "

"मुहब्ब़त में धोखा खाया इंसान कभी- कभी आत्महत्या तक के ख्याल में जाकर दुखद अवसाद में चला जाता है, गीत के माध्यम से जीने की चाह जगाने का प्रयास "

प्यार हमारा मिट जाए तो,
जीवन  है  बेकार  नही|
एक गया तो फिर आएगा,
जीवन का है सार यही|

भावों की लहरों से मन में,
आने ना दो बाढ़ कभी|
दुःख कष्टों की धाराओं को,
बनने ना दो बाढ़ कभी|

मन से मन का है प्रेम अमर,
जीवन की  है  रीत  यही|
हर प्राणी से प्रीत मधुर हो,
मनु जीवन की जीत यही|

मीत मिलन की विरह व्यथा से,
ना  हो  तुम  हैरान  कभी|
सहज  प्रेम  है  ईश्वर भक्ति,
मत  होना   हैरान   कभी|

सेवा को निज काम बना लो,
मन को तुम बलवान करो|
अंतस्तल को मजबूती दो,
शुभ हित की पहचान करो|

©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल

Friday, 22 May 2020

वट वृक्ष/ बरगद ["जय जय हिन्दी" वाट्सएप पटल विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत द्वारा संचालित] विषय पर साहित्यकारों की अद्भुत लेखनी

[22/05, 16:20] +91 79035 61629:
             🥦वट /बरगद🥦
               छंद- कुंडलिया

अपना भारत देश  है, यूँ  ही  नहीं  महान ।
तुलसी पीपल ही नहीं, वट में भी भगवान।।

वट  में  भी भगवान,  पूजते  हैं  नर - नारी।
वृक्षों का सम्मान, रीति यह कितनी न्यारी ।।

हरा -भरा  हो देश, सभी  का  है यह  सपना ।
पुलकित हो परिवेश, उमंगित जीवन अपना ।।

-रामस्वरूप मयूरेश 🙏

[22/05, 16:36] +91 99349 63293:

       आज का विषय ~ बरगद

बरगद की छांव में 
जीवन के रंग में ,
यादों के परिन्दें ,
यूँ मचल मचल जाता है, 
कोई नहीं जानता ,
ये बरगद की छांव में, 

मै रहूँ न रहूँ मेरा, 
अस्तित्व  रहेगा, 
जीवन के ढाल में ,
मजबूरी के हाथों में, 
तू बरगद की छांव में ,

हालात इधर भी हैं ,
उधर भी हैं ,
क्या पता इसी बहाने, 
तुम पास रहों या दूर ,
यूँ बरगद की छांव में!

~ रूपेश कुमार©
स्वरचित एव मौलिक

[22/05, 16:40]
        बरगद

बरगद का वह पेड़ पुराना
कहता है नित नया तराना
सदियों की गाथा को कहता
एक बुजुर्ग सम खड़ा है रहता।

इसके आँचल की घनी छाँव में
लगती बैठक सदा गाँव में
लाखों  पंछी  करें बसेरा
रिश्ता प्यारा इसका मेरा।

सावित्री ने पूजा करके
यम से लड़ने की ली ठान
यम के द्वार पहुँच कर वापस
लायी  सत्यवान के प्राण।

ओम प्रकाश फुलारा "प्रफुल्ल"

[22/05, 16:46] +91 80922 36568:
      चौपाई

आओ  बरगद सभी  लगाएं,
कुदरत को हम अभी सजाएं।

प्राण वायु से जीवन
जीवन की यह राह दिखाए।

वृक्ष सनातन धर्म हमारा,
वट चलावे संसार सारा।

प्राणवायु इससे ही आवे,
यही समीर देव मिलवावे।

आ बचाएं अभी हरियाली,
तब मनेगी अबकी दिवाली।

बरगद देता हवा सुहानी,
यह चलावे पवन मस्तानी।

कहानी कहे मेरी नानी,
वट लाता बादल से पानी।

कलकल बहती नदिया कहती,
इससे ही तो दरिया बहती।
महेश"अमन"
[22/05, 16:57] +91 99207 96787: 9920796787****रवि रश्मि 'अनुभूति '

   🙏🙏

   वट / बरगद
============
वट वृक्ष है घना छायादार
फैला लगे यह मायादार
खिंचे सब हैं आते इस ओर , 
बना सभी का यही आगार ।

ऊँचा दीर्घजीवी पेड़ पुराना
पूरे गाँव का आशियाना
सभी करते सलाह मशवरा ,
सबमें है बस यही सयाना ।

पूरी छाया सबको देता
परोपकार कर सुखी होता
देता ऑक्सीजन शुद्ध वायु ,
वातावरण पवित्र हो जाता ।

वट की सदैव पूजा होती
मन्नत भी तो पूरी होती
पंछियों का बसेरा है यह ,
छाँव भी कितनी घनी होती ।
%%%%%%%%%%%%%%%

(C) रवि रश्मि 'अनुभूति '
22.5.2020 , 436 पीएम पर रचित ।
#####################

●●
🙏🙏समीक्षार्थ व संशोधनार्थ ।🌹🌹
[22/05, 16:58] Nitendra Singh Parmar भारत: *गीत:- बरगद*

बरगद  नींचे खेल सदा,हमनें तो खेलें हैं।
चाहें हो चार जने हम, चाहें तो अकेले हैं।।
बरगद नींचे खेल सदा........

बहुत पुराना पेड़ बड़ा था,सबकों देता छांव था।
उसी पेड़ से सुंदर दिखता मेरा प्यारा गाँव था।।
लटे लटकती उसकी देखो उसी पे झूले हैं।।
बरगद नींचे खेल सदा हमनें......1

बना हमारा दोस्त वो प्यारा,कभी नहीं भरमाये।
लुका छिपी उसके संग खेलूं,वो निसदिन सरमाये।।
उसकी छांव में जाने कितने लगते मेले हैं।।
बरगद नींचे खेल सदा हमनें.......2

स्वच्छ हवा हम सबको देता,कभी नहीं इतराता।
नहीं कभी हम मिलने जाये, तो वो घबरा जाता।।
भारत दुनियाभर में देखों, कितने झमेले हैं।।
बरगद नींचे खेल सदा हमनें.......3

नीतेंद्र सिंह परमार "भारत"
छतरपुर मध्यप्रदेश
[22/05, 16:58] बाबा बैद्यनाथ झा जी: प्रदत्त विषय पर एक कुण्डलिया सादर समीक्षार्थ--

                           ॐ
              विषय--*वट/बरगद*
                *कुण्डलिया छन्द*
                @बाबा बैद्यनाथ झा

करती    हर   सौभाग्यिनी,   वटसावित्री    पर्व।
दीर्घ आयु पति को मिले,जिस पर पुनि हो गर्व।।

जिस   पर   पुनि  हो  गर्व,करे  श्रद्धा  से पूजा।
पति   ही   हैं  सर्वस्व, नहीं  उनके   सम  दूजा।

सत्यवान    को   पूज,  डालियाँ   नारी  भरती।
*वट*  में  धागे  बान्ध, व्रती फिर  पूजन करती।।
[22/05, 17:14] +91 98440 94937: विषय : एक बरगद की कथा
विधा : अतुकान्त रचना

दादा के दादा ने एक बरगद का पेड़ लगाया,
किसको मालूम था कि एक दिन यह भी बूढ़ा हो जायेगा।
बरगद ने छाया दी,
बरगद ने आश्रय दिया, न जाने कितनों को
कितनों के बने आशियानें, बरगद की शाखों पर
बरगद बाहें पसारे बुलाता रहा सबको,
समाता रहा सबको,
फिर भी किसी ने कुल्हाड़ी चला दी,
किसी ने ताने दिए,
किसी ने मन्नत का धागा बांध दिया
और किसी सुहागन ने सुहाग के फेरे लिए।
बरगद ने सब कुछ देखा, सब कुछ सहा,
कभी भोगा आलिंगन और कभी बिरह।
पर दुखी हो गया बरगद, जब मैं बूढ़ा हो उसकी शरण में आया,
तिरस्कृत सा, परिवार का सताया हुआ
मैंने उसकी बांह पकड़ ली
उसकी डालियों से चिपक कर मैं बहुत रोया,
और उसकी एक धरती की ओर आने वाली शाख से लटक गया।
मैंने तो सिसक-सिसक अपना दम तोड़ दिया,
पर बरगद रोया, वह बहुत रोया,
आह ! क्यूं न मुझे बचा पाया।
जिन पूर्वजों ने उसे जन्म दिया था,
उनका कर्ज़ क्यूं न चुका पाया!
आज वह सचमुच बहुत बूढ़ा हो गया
आज वह सचमुच बहुत बूढ़ा हो गया।

मधु सक्सेना
बंगलौर
२२.०५.२०२०

संशोधित
[22/05, 18:34] +91 73026 85435: बड़मावस को पूजते,मिलकर सब वट  पेड़।
सब गुण प्रतिदिन पूजिए,चाल न चलना भेड़।

पतझड़ में भी हो हरा, बरगद पेड़ विशाल।
जड़ फल छाल पत्र तना, करते सभी कमाल।

पावन बरगद दे हमें, साफ हवा दिन रात।
गंदी बदले साफ में,यही अनोखी बात।

फोड़े फुन्सी हैं त्वचा, दांत मसूड़े घाव।
वट-जड़ काढ़ा पी भगे,मधुमेह औ तनाव ।

रक्त वसा से हो दुखी, सिर के झड़ते बाल।
चर्म रोग में ले सदा, काढ़ा वट की छाल।

हितेन प्रताप सिंह तड़प
मेरठ उत्तर प्रदेश
हिंदुस्तान
समय से न भेज पाने के  कारण क्षमाप्राथी हू।
[22/05, 19:48] +91 94126 80810:

विषय         -     वट  /  बरगद
विधा          -      मुक्त

वट वृक्ष है अद्भुत जग में
युगों से दे रहा प्राण वायु ये
देवालय सा  है पावन ये
तीन देवों का परम् द्वार  ये..।।

दुखियों को यह आश्रय देता
संताप सभी के है हर लेता
विश्वकोष सा है विशाल ये
सभी ग्रन्थों का है सार ये..।।

अखण्ड सौभाग्यवती वर दे
सावित्री को था अमर बनाया
संजीवनी सी औषधि देकर
तुमने वैद्यों का मान बढ़ाया ..।।

महाकाय हो अजान बाहु तुम
सुनते सबकी करुण पुकार
व्यथा दुखियों की सुन करते बेड़ा पार
पूरी करते कामना है यही विश्वास..।।

आए जो भी शरण, मिले अभय दान
पशु, पक्षी,मानव सबका हो कल्याण
निराश न होता कोई, बनते सबके काम
इस धरा पर वट समान, दूजा न धाम

डॉ.राजेश कुमार जैन
श्रीनगर गढ़वाल
उत्तराखंड

Wednesday, 4 December 2019

छन छन पयलिया भोजपुरी गीत (कवि श्याम कुंवर भारती)

भोजपुरी गीत (श्रिंगार रस )- छन छन पयलिया

छन छन पयलिया ना बजावा गोरी |
ठहरल पनिया अगिया ना लगावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
मिसरी से मिठ लगे तोहार बोलिया |
मनवा भरमावे बोले जईसे कोइलिया |
पुरवा अँचरा ना उड़ावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
महके बदनवा जईसे केसर गंधवा |
चहके नयनवा जइसे कमल बँधवा |
सुतल असिया ना जगावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
हंसेलु त लागे जईसे मोती झरे मुहवा |
जेने जेने जालू खिले फुलवा तहवा |
खन खन कंगना ना खनकावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
लागल आसरा बनबू हमरो रनिया |
केसिया उड़ावेलू त बरसे घटा पनिया |
भारती के आसरा पुरावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |

श्याम कुँवर भारती [राजभर]
कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

परिवर्तन (कवि देवेन्द्र चौधरी तिरोडा जी)

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              परिवर्तन

मुझे सत्य एव अहिंसा के ये दो रतन चाहिए.
हराभरा खुशनुमा सिर्फ मेरा ये वतन चाहिए.

मेरे जबान से निकले है मेरे जो लब्ज दो टूक,
है मालिक असत्य एव हिंसा का पतन चाहिए.

जिंदगी के हर हालात जिसने जीना सिकाया,
सिर्फ तो दाल चावल रोटी पकाने बर्तन चाहिए।

हसीन वादियों में बसा मेरा भारत देश महान,
हर भारत के वासियों के हातो से जतन चाहिए।

खयाल आता नही इस दौर में किसीका मुझे,
देशमे विकाससंग विचारोंका परिवर्तन चाहिए।
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✍ कवि-देवेंद्र चौधरी, तिरोडा
जिला-गोंदिया (महाराष्ट्र)
ता. 20/11/2019 को
***********************************
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पाखण्ड (भुवन बिष्ट जी)

विषय :-  पाखण्ड
विधा :- कुण्डलिया

धरती पर पाखण्ड का , सजा हुआ बाजार ।
मानव फसते जा रहे ,  होकर  के  लाचार ।।
होकर  के  लाचार , सभी  झांसे  में  आते ।
मलते हैं फिर हाथ , ठगा  सा खुद  को पाते।
कवि कहे एक बात , लालसा कभी न मरती ।
करता  जो  पाखण्ड , नष्ट  कर देती  धरती ।।

बनकर भूखे भेड़िये , पड़ते  हैं  सब टूट ।
धर्म-कर्म के नाम पर , मची पड़ी है लूट ।।
मची  पड़ी  है लूट , बहुत  हैं  यहाँ लुटेरे ।
मंदिर ,मस्जिद ,चर्च , डालते हैं सब डेरे ।।
झूठी चलते चाल , रहे सब सीना तनकर ।
रचते  हैं  पाखण्ड , लूटते  साधु बनकर ।।

मानव नित पाखण्ड कर , रचते  रहते  स्वांग ।
लोगो  को  हैं  फांसते , रखते अपनी  मांग ।।
रखते अपनी  मांग , करे  हैं सब  मन -मानी ।
धर  साधु  का  वेश , फिरे  हैं  बनकर ज्ञानी ।।
कहुँ मैं  मन  की बात , बन रहा क्यों है दानव ।
अपनी सब पहचान , आज खोता क्यों मानव ।।

        हरीश बिष्ट
रानीखेत ।। उत्तराखण्ड ।।

विश्व जनचेतना ट्रस्ट (विशेष सूचना)

🙏💐विशेष सूचना🙏💐

पटल पर किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो इसके लिए आप सभी को कुछ बातें स्पष्ट करना चाहता हूँ।

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत द्वारा चार पटलों का संचालन किया जा रहा है-

१ जय जय हिंदी - इस पटल पर केवल लिखित रचना प्रेषित की जाएंगी। इसके अलावा किसी भी प्रकार की सामग्री वर्जित है।

२ जय जय काव्य चित्रशाला- इस पटल पर आप अपनी उपलब्धियों से सम्बंधित चित्र या कोई अन्य सामग्री जो आप साझा करना आवश्यक समझते हैं वही प्रेषित की जाए। इस पटल पर किसी भी प्रकार की लिखित या रचनात्मक सामग्री वर्जित है।

३ साहित्यिक पाठशाला- इस पटल पर सीखने सिखाने की इच्छा रखने वाले साहित्यकारों का स्वागत है इस पटल का निर्माण केवल सीखने सिखाने म निमित्त किया गया है। इस पटल पर 100 रुपये सदस्यता शुल्क के साथ ही प्रवेश प्राप्त किया जा सकता है।

४ नारी समृद्धि मंच- यह पटल महिलाओं के उत्थान, महिला जागृति एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। यहाँ केवल महिलाओं को ही शामिल किया जाएगा इच्छुक महिलाएँ संपर्क करें।

नोट:- जय जय हिंदी हम सबका एक परिवार है जब हम सब लोग मिलजुल कर एक साथ कदम बढ़ाते हुए चलेंगे तभी हमारा यह परिवार बुलन्दियों को छू पाएगा। आइए हम सब मिलकर नियमपूर्वक अपने परिवार की समृद्धि के लिए कार्य करें । तन मन धन से आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।

ओम प्रकाश फुलारा "प्रफुल्ल"
अध्यक्ष
प्रदेश इकाई उत्तराखंड
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत
9411583567

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत का प्रथम स्थापना दिवस (30 नवम्बर 2019)

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत का प्रथम स्थापना दिवस समारोह ~30/11/2019
यात्रावृत्त सह संस्मरण

पूर्व निर्धारित योजनानुसार प्रिय मित्र आलोक सैनी जी ने प्रातः 3:30 बजे फोन करके मुझे जगाया और प्रातः पाँच बजे हमारे घर आ धमके|हम भी संस्था की आवश्यक सामग्री एक बैग में रखकर, एक बैग में कुछ फल और एक बैग में स्वयं का आवश्यक सामान भरकर स्वयं को तैयार कर ,हम दोनों चाय पीकर 5:50 बजे घर से निकल गये, आलोक जी ने गैराज से गाड़ी निकाली और 6:10 पर आ. कौशल पाण्डेय आस दादाश्री के घर की ओर लपके, दरवाजे पर पहुँचकर हार्न पर हार्न बजाना शुरू किया तब जाकर आस दादाश्री निकले, फिर राजेश मिश्र प्रयास जी के घर की ओर बढ़ चले कि याद आया कि कि कुछ सामान कह गया है, आस दादाश्री से घर से वह सामान लेने हम आस दादा के साथ पैदल ही निकल पड़े, सामान लेकर गाड़ी तक पहुँचे और गाड़ी आ. प्रयास जी के घर की ओर बढ़ी, प्रयास जी सड़क पर ही खड़े नजर आये, जल्दी से बैठाया और कार अपने लक्ष्य की ओर दौड़ने लगी, फिर बातों का सिलसिला चल पड़ा|ऐसा लग रहा था कि मानो गाड़ी और बातों की स्पीड प्रतिस्पर्धा कर रही हो |
शीघ्र ही बरेली पहुँच गया था आ. राजेश मिश्र प्रयास जी को एक काम से किसी से मिलना था, वहाँ गया, काम निपटाया, चाय नाश्ता किया और आगे बढ़ गया|
मुरादाबाद पहुँचा, वहाँ हम सबको एक चौराहे पर छोड़कर आलोक जी आ. रश्मि वर्मा रश जी को लेने उनके घर गये और हम सब सड़कें नापते रहे|
पौन घण्टे बाद आपके दर्शन हुए, कब तक हम सब चाय नाश्ता कर चुके थे, मैंने पान खाया और कार पर बैठ आगे बढ़ गया, कुछ दूर आगे बढ़ने पर भूख ने जोर पकड़ा, एक ढाबे पर रुका, रश्मि जी पूड़ी, मेंथी सब्जी लायी थीं, और प्रयास जी कचौड़ी चटनी लाये थे, ढाबे से चाय ली और खाने पर टूट पड़े, खा पीकर आगे बढ़े, प्रयास जी ने अमरूद रास्ते में खरीदे थे अब उनका नम्बर था|प्रयास जी काला नमक लगा लगाकर दे रहे थे और हम सब गटक रहे थे |कुछ और आगे बढ़कर गुलाबजामुन खाये, मजा आ गया, फिर आगे की ओर लपके, रास्ते में उत्तराखंड अध्यक्ष ओमप्रकाश फुलारा प्रफुल्ल जी जो कि सुबह ही पहुँच चुके थे और महाराष्ट्र के देवेन्द्र चौधरी जी भी आ गये थे, से बात होती रही|आ. सुशीला धस्माना मुस्कान दीदी भी दिल्ली से आ रहीं थीं|प्रभु कृपा से शाम चार बजे हरिद्वार पहुँच ही गये |माता वैष्णो देवी शक्ति धाम में कार्यक्रम की और रुकने का व्यवस्था पूर्व निर्धारित थी|चाय पीकर कुछ व्यवस्थाओं का अवलोकन किया, माता वैष्णो देवी ट्रस्ट के महंत श्री सुमित जी महाराज के मुलाकात थी सौम्यता सहजता, सरसता और विनम्रता आपके गुणों की चमक को बढ़ा रहा था|कुछ देर बाद मैं प्रफुल्ल जी के साथ घूमने चला गया, फिर लौकर फूल माला की व्यवस्था की, प्रयास जी के बच्चे की, मुस्कान दीदी और उनकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है जब यह समाचार मिला तो मन दुःखित हुआ|पर संयम के साथ कार्यक्रम को सम्पन्न करना था, अतैव सामान्य सा दिखा|
      शाम 6:30 पर माता सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम अध्यक्ष आ. गुरुजी महंत श्री दुर्गा दास जी महाराज ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया |तत्पश्चात सभी साहित्यकारों का स्वागत अभिनंदन किया गया |आ. देवेन्द्र चौधरी जी को विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत की महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष बनाया गया और आ. रश्मि वर्मा रश जी को नारी समृद्धि मंच का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, इस आशय का सम्मान पत्र, माला व पुष्प गुच्छ ,बाँसुरी, मुहब्बत गजल संग्रह, नंदिनी काव्य संग्रह, दोशाला ओढ़ाकर ,बैज लगाकर प्रदान किया गया |उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष आ. ओमप्रकाश प्रफुल्ल जी को रजत पत्र के साथ 1000₹ की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया |आ. दुर्गा दास महाराज जी को व आ. महंत श्री सुमित मिश्रा जी महाराज की भी यथोचित अंगवस्त्र के साथ सम्मानित किया गया |आ. जागेश्वर प्रसाद निर्मल दादाश्री द्वारा रचित पुस्तक यजुर्वेद प्रकाश का विमोचन आ. महंत श्री दुर्गा दास जी महाराज ने किया ,जिसमें सभी रचनाकारों ने भाग लिया |अन्य रचनाकारों का भी यथोचित स्वागत सत्कार करने के बाद एक दौर कविता का चला, आनंद आ गया |
  कार्यक्रम समापन वेला में आ. मुस्कान दीदी भी मिठाई लेकर आ गयीं ,उनका भी ससम्मान स्वागत किया गया, कुशलक्षेम पूछी, उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, फिर सभी साथियों ने स्वादिष्ट भोजन किया और सर्दी होने के कारण कमरे में एकत्रित हुए,सबको मुस्कान दीदी ने मिठाई खिलाई, और किए गये वादानुसार सबके 500₹ आ. प्रफुल्ल जी ने वापस किए|फिर काफी देर बातें हुईं |कई साथियों ने संस्था को स्वेच्छापूर्वक सहयोग राशि प्रदान की|
आ. रश्मि जी ~500₹
आ. देवेन्द्र चौधरी जी ~500₹
आ. आस दादाश्री ~500₹
आ. मुस्कान दीदी ~500₹
आ. कौशल आस दादा ~500₹
आ. प्रफुल्ल जी ~500₹
आ. प्रयास जी ~500₹
इस पावन यज्ञ में 1000₹ की आहुति मेरे द्वारा भी समर्पित की गयी|मुस्कान दीदी के साथ अन्य कई साथी लोग आये थे जो हरिद्वार से ही थे, विदा ले उन्हीं के साथ चली गयीं|बातें करते करते हम सब सो गये |
प्रातः उठा ही था कि देखा आ. रश्मि जी चाय बनाकर ले आयीं थीं सबने चाय पी, आ. रश्मि जी का स्वभाव बहुत ही मृदुल है, सौम्य आस्थावान, दयावान व्यक्तित्व, आपकी सहनशीलता और कुछ कर गुजरने की ललक सबको आकर्षित कर लेती है |
सभी दैनिक क्रिया से निपट कर विचारगोष्ठी कक्ष में पहुँचे, जिसकी अध्यक्षता महंत श्री सुमित मिश्रा महाराज जी ने की|जहाँ विशिष्ट अतिथि के रूप में एक और संत शिरोमणि साक्षी को रूप में बैठे थे|जहाँ सभी पदाधिकारियों के विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के कार्यों को गति देने वाले अपने अपने विचारों को रखा, बृद्ध सेवा घर के निमित्त संस्था को एक लाख रुपये जमीन क्रय करने हेतु देने की घोषणा आ. आलोक सैनी जी ने की|प्रिय प्रयास जी का सरस प्रयास प्रफुल्ल जी की सक्रियता, आस जी का विश्वास,  देवेन्द्र आलोक के साथ मुस्कान रश्मि आनंद का कारण बनती है, जो संस्था विकास की दिशा निर्धारण में सम्बल बनती है, यह गौरव का विषय है | आ. कार्यक्रम अध्यक्ष सुमित मिश्रा जी महाराज ने कहा कि माता वैष्णो देवी शक्ति धाम आपका है जब चाहें कार्यक्रम करें, आप सबके लिए हमेशा इसके द्वार खुले हैं|महाराष्ट्र की धरती से पधारे देवेन्द्र चौधरी जी ने बरबस ही सबको वश में कर कर लिया था, जादूगर सा जादू चलाते हैं, संस्था की महाराष्ट्र इकाई को कितना आगे ले जाते हैं, यही देखना है |अध्यक्ष नियुक्त कर संस्था गौरवान्वित है |
     प्रिय देवेन्द्र जी और प्रफुल्ल जी को वहीं छोड़ कर हम ऋषिकेश की ओर बढ़ गये, रामझूला के आगे चोटीवाला रेस्टोरेन्ट में खाना खाया, समयाभाव के कारण उस रमणीक स्थान से वापस लौटना पड़ा, और घर की ओर चल दिया|रास्ते भर नोकझोंक के साथ हँसीमजाक करते हुए हम सब मुरादाबाद पहुँचे, जहाँ आ. रश्मि जी के अनुरोध पर उनके घर पहुँचे चाय नाश्ता किया, दोनों बच्चियों सहजल और सिद्धि से मिला, बच्चे दोनों बहुत प्यारे लगे|शीघ्र ही रश्मि जी से विदा ले आगे बढ़ा,प्रफुल्ल जी भी रास्ते में थे, देवेन्द्र चौधरी जी वहीं रुके थे क्योंकि उन्हें अगले दिन जाना था|अर्धरात्रि में निज निवास स्थान पर पहुँचा, सबको छोड़ते हुए, कार खड़ी करके मैं और आलोक अपने अपने घर की ओर बढ़े |

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दिलीप कुमार पाठक "सरस"

Sunday, 13 October 2019

पक्षी प्रेम (आत्ममंथन)

     आत्ममंथन

रात को दूध लेने मदर डेयरी पहुंचा तो दूध खत्म हो चुका था थोड़ा जल्दी का अलार्म लगाया सोचा कल जल्दी नित्यकर्म निपटा कर दूध ले आऊंगा क्योंकि 9:00 बजे तक मरम्मत कार्य हेतु मिस्त्री को आना था, सुबह उठकर दूध ले आया और प्रभात का आनंद लेने छत पर पहुंचा नवरातों के सुंदर भोर शीतल पवन के झोंके शरीर और मन को आनंदित कर रहे थे इन दिनों में प्रकृति अपनी समान अवस्था में होती है ना गर्मी की तपन ना जाड़े की ठिठुरन ! इस सुबह में एक प्यारा अहसास था चारों ओर शांति ताजगी और पंछियों की चहचहाहट और अचानक ! एक चिड़िया मेरे छत की मुंडेर पर रखे पानी के कसोरे के पास आकर बैठ गई बड़ी उत्सुकता से कूदकर कसोरे पर चढ़ी पर शायद पानी ना होने के कारण इधर-उधर झांककर मेरी ओर आशा भरी निगाहों से देखा मानो पूछ रही हो इतना तो कर सकते हो हमारे लिए पानी तो मोल नहीं आता तुम भी तो इतना व्यर्थ करते हो|
    घर पर मरम्मत के चलते पिछले दिन पानी डालना शायद भूल गया था नन्ही चिड़िया कि वह नजरें मुझे अपराधिक सा महसूस करा रही थी एक अजीब सा पश्चाताप मुझे झकझोर गया ! हम किसी को कुछ देने वाले कौन हैं देता तो ईश्वर ही है पर हमें निमित्त तो बनाया है उसने तो क्यों अपने कर्तव्य को ठीक से नहीं समझा, मेरा आज देर से उठना मुझे अपराध बोध का आभास करा रहा था, ना जाने कितने पंछी  आकर लौट जाते होंगे भोर में क्योंकि वह हमारी तरह 7:00 बजे नहीं उठते पार्कों में कितने ही व्यक्ति चिड़ियों को दाना डालते हैं पर शायद किसी ज्योतिषी या पंडित के कहने पर या अपने ग्रह ठीक करने या पुण्य कमाने के लिए पर क्या किसी ने देखी होगी नन्ही चिड़िया की प्रश्नवाचक  दृष्टि ??
जो हमसे कुछ अपेक्षाएँ रखती है|  

                 ~ सुबोध कुमार


Subodh kumar
Delhi
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  Book writen- -  मेरे मन के गांव में ( कविता संग्रह)

Sunday, 6 October 2019

नवरात्रि के पावन अवसर पर माता के आशीर्वाद स्वरूप कुछ दोहे साहिल की कलम से (06/10/2019)

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             दोहे

माता  की  किरपा  रहे, सभी  करे  गुणगान |
कष्ट हरण संबल मिले, हो जीवन सुख मान||

नवदुर्गा  की  शक्ति से, असुर  गये सब हार|
शक्ति साधना से हटे, विकल कष्ट का भार||

मन मन्दिर को साध लो, नत मस्तक हो शीश|
भव  बंधन  माता  हरे, मिले  स्नेह  आशीष||

कंटक  पथ  सुन्दर बने, सब  में हो  सहकार|
माँ  वरदा  आशीष  से, भव  बंधन  हो पार||

माँ  दुर्गा  आशीष  से,  हो  जीवन  आसान|
तेजवीर  रवि  तेज से, मिले  धवल वरदान||

© डॉ० राहुल शुक्ल साहिल






पत्तल दोना परई (सकोरा) व मिट्टी के बर्तन व गिलास में भोजन करने व पानी पीने के वैज्ञानिक लाभ


आओ जाने पत्तल- परई (सकोरा) व मिट्टी के गिलास में भोजन करने के  वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक लाभ — —
पत्तलों की परंपरा अद्वितीय है इसे फिर से अपनाएँ ... अब तो जर्मनी और ब्रिटेन भी हरे पत्तों की प्लेट बना रहा है! ००००००
पत्तल में भोजन के अद्भुत लाभ...
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में 2000 से अधिक वनस्पतियों की पत्तियों से तैयार किये जाने वाले पत्तलों और उनसे होने वाले लाभों के विषय में पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान उपलब्ध है पर मुश्किल से पाँच प्रकार की वनस्पतियों का प्रयोग हम अपनी दिनचर्या में करते है।
आम तौर पर केले की पत्तियों में खाना परोसा जाता है। प्राचीन ग्रंथों में केले की पत्तियों पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है। आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियों का यह प्रयोग होने लगा है।
सुपारी के पत्तों से बनाई गई प्लेट, कटोरी व ट्रे, जिनमें भोजन करना स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक है।
जिसे प्लास्टिक, थर्माकोल के ऑप्शन में उतरा गया है क्योंकि थर्माकोल व प्लास्टिक के उपयोग से स्वास्थ्य को बहुत हानि भी पहुँच रही है ।

#_सुपारी के पत्तों यह पत्तल केरला में बनाई जा रही हैं और कीमत भी ज्यादा नही, तक़रीबन 1.5, 2, रुपये साइज और क्वांटिटी के हिसाब से अलग अलग है।
#_पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
#_केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है।
#रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है। पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी इसका उपयोग होता है। आम तौर पर लाल फूलो वाले पलाश को हम जानते हैं पर सफेद फूलों वाला पलाश भी उपलब्ध है। इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासीर (पाइल्स) के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है।
#_जोड़ो के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल उपयोगी माना जाता है। पुरानी पत्तियों को नयी पत्तियों की तुलना मे अधिक उपयोगी माना जाता है।
#_लकवा (पैरालिसिस) होने पर अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलों को उपयोगी माना जाता है।
पत्तलों से अन्य लाभ :
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है।
2. न पानी नष्ट होगा।
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा।
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे l
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी।
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी।
7. प्रदूषण भी घटेगा।
8. सबसे महत्वपूर्ण झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है, एवं मिटटी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है।
9. पत्तल बनाने वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा।
10. सबसे मुख्य लाभ, आप नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा। जो जल प्रदूषण में आपको सहयोगी बनाता है।
सभी लोगों को भंडारे, विवाहोत्सव, जन्मोत्सव आदि भोज एवं अन्य शुभ उत्सवों एवं पार्टियों  में डिस्पोजल की जगह इन पत्तलों का प्रचलन करना चाहिए।
       धन्यवाद
                  संकलन~  डॉ० राहुल शुक्ल साहिल
                        संजीवनी वेलफेयर सोसाइटी,
                मिश्रा मार्केट, कालिन्दीपुरम चौकी के पास,
                         राजरूपपुर, प्रयागराज उ०प्र०

शिव छन्द (राम - राम)

🍁🎊 शिव छंद 🎊🍁         चार चरण प्रति चरण ११ मात्राएं, ३,६,९, वीं मात्रा लघु | दो-दो चरण सम तुकांत , आवश्यकतानुसार गुरु को २ लघु में लिख स...