Wednesday, 4 December 2019

छन छन पयलिया भोजपुरी गीत (कवि श्याम कुंवर भारती)

भोजपुरी गीत (श्रिंगार रस )- छन छन पयलिया

छन छन पयलिया ना बजावा गोरी |
ठहरल पनिया अगिया ना लगावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
मिसरी से मिठ लगे तोहार बोलिया |
मनवा भरमावे बोले जईसे कोइलिया |
पुरवा अँचरा ना उड़ावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
महके बदनवा जईसे केसर गंधवा |
चहके नयनवा जइसे कमल बँधवा |
सुतल असिया ना जगावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
हंसेलु त लागे जईसे मोती झरे मुहवा |
जेने जेने जालू खिले फुलवा तहवा |
खन खन कंगना ना खनकावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |
लागल आसरा बनबू हमरो रनिया |
केसिया उड़ावेलू त बरसे घटा पनिया |
भारती के आसरा पुरावा गोरी |
हमरो जियरा ना जरावा गोरी ना |

श्याम कुँवर भारती [राजभर]
कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

परिवर्तन (कवि देवेन्द्र चौधरी तिरोडा जी)

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              परिवर्तन

मुझे सत्य एव अहिंसा के ये दो रतन चाहिए.
हराभरा खुशनुमा सिर्फ मेरा ये वतन चाहिए.

मेरे जबान से निकले है मेरे जो लब्ज दो टूक,
है मालिक असत्य एव हिंसा का पतन चाहिए.

जिंदगी के हर हालात जिसने जीना सिकाया,
सिर्फ तो दाल चावल रोटी पकाने बर्तन चाहिए।

हसीन वादियों में बसा मेरा भारत देश महान,
हर भारत के वासियों के हातो से जतन चाहिए।

खयाल आता नही इस दौर में किसीका मुझे,
देशमे विकाससंग विचारोंका परिवर्तन चाहिए।
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✍ कवि-देवेंद्र चौधरी, तिरोडा
जिला-गोंदिया (महाराष्ट्र)
ता. 20/11/2019 को
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पाखण्ड (भुवन बिष्ट जी)

विषय :-  पाखण्ड
विधा :- कुण्डलिया

धरती पर पाखण्ड का , सजा हुआ बाजार ।
मानव फसते जा रहे ,  होकर  के  लाचार ।।
होकर  के  लाचार , सभी  झांसे  में  आते ।
मलते हैं फिर हाथ , ठगा  सा खुद  को पाते।
कवि कहे एक बात , लालसा कभी न मरती ।
करता  जो  पाखण्ड , नष्ट  कर देती  धरती ।।

बनकर भूखे भेड़िये , पड़ते  हैं  सब टूट ।
धर्म-कर्म के नाम पर , मची पड़ी है लूट ।।
मची  पड़ी  है लूट , बहुत  हैं  यहाँ लुटेरे ।
मंदिर ,मस्जिद ,चर्च , डालते हैं सब डेरे ।।
झूठी चलते चाल , रहे सब सीना तनकर ।
रचते  हैं  पाखण्ड , लूटते  साधु बनकर ।।

मानव नित पाखण्ड कर , रचते  रहते  स्वांग ।
लोगो  को  हैं  फांसते , रखते अपनी  मांग ।।
रखते अपनी  मांग , करे  हैं सब  मन -मानी ।
धर  साधु  का  वेश , फिरे  हैं  बनकर ज्ञानी ।।
कहुँ मैं  मन  की बात , बन रहा क्यों है दानव ।
अपनी सब पहचान , आज खोता क्यों मानव ।।

        हरीश बिष्ट
रानीखेत ।। उत्तराखण्ड ।।

विश्व जनचेतना ट्रस्ट (विशेष सूचना)

🙏💐विशेष सूचना🙏💐

पटल पर किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो इसके लिए आप सभी को कुछ बातें स्पष्ट करना चाहता हूँ।

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत द्वारा चार पटलों का संचालन किया जा रहा है-

१ जय जय हिंदी - इस पटल पर केवल लिखित रचना प्रेषित की जाएंगी। इसके अलावा किसी भी प्रकार की सामग्री वर्जित है।

२ जय जय काव्य चित्रशाला- इस पटल पर आप अपनी उपलब्धियों से सम्बंधित चित्र या कोई अन्य सामग्री जो आप साझा करना आवश्यक समझते हैं वही प्रेषित की जाए। इस पटल पर किसी भी प्रकार की लिखित या रचनात्मक सामग्री वर्जित है।

३ साहित्यिक पाठशाला- इस पटल पर सीखने सिखाने की इच्छा रखने वाले साहित्यकारों का स्वागत है इस पटल का निर्माण केवल सीखने सिखाने म निमित्त किया गया है। इस पटल पर 100 रुपये सदस्यता शुल्क के साथ ही प्रवेश प्राप्त किया जा सकता है।

४ नारी समृद्धि मंच- यह पटल महिलाओं के उत्थान, महिला जागृति एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। यहाँ केवल महिलाओं को ही शामिल किया जाएगा इच्छुक महिलाएँ संपर्क करें।

नोट:- जय जय हिंदी हम सबका एक परिवार है जब हम सब लोग मिलजुल कर एक साथ कदम बढ़ाते हुए चलेंगे तभी हमारा यह परिवार बुलन्दियों को छू पाएगा। आइए हम सब मिलकर नियमपूर्वक अपने परिवार की समृद्धि के लिए कार्य करें । तन मन धन से आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।

ओम प्रकाश फुलारा "प्रफुल्ल"
अध्यक्ष
प्रदेश इकाई उत्तराखंड
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत
9411583567

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत का प्रथम स्थापना दिवस (30 नवम्बर 2019)

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत का प्रथम स्थापना दिवस समारोह ~30/11/2019
यात्रावृत्त सह संस्मरण

पूर्व निर्धारित योजनानुसार प्रिय मित्र आलोक सैनी जी ने प्रातः 3:30 बजे फोन करके मुझे जगाया और प्रातः पाँच बजे हमारे घर आ धमके|हम भी संस्था की आवश्यक सामग्री एक बैग में रखकर, एक बैग में कुछ फल और एक बैग में स्वयं का आवश्यक सामान भरकर स्वयं को तैयार कर ,हम दोनों चाय पीकर 5:50 बजे घर से निकल गये, आलोक जी ने गैराज से गाड़ी निकाली और 6:10 पर आ. कौशल पाण्डेय आस दादाश्री के घर की ओर लपके, दरवाजे पर पहुँचकर हार्न पर हार्न बजाना शुरू किया तब जाकर आस दादाश्री निकले, फिर राजेश मिश्र प्रयास जी के घर की ओर बढ़ चले कि याद आया कि कि कुछ सामान कह गया है, आस दादाश्री से घर से वह सामान लेने हम आस दादा के साथ पैदल ही निकल पड़े, सामान लेकर गाड़ी तक पहुँचे और गाड़ी आ. प्रयास जी के घर की ओर बढ़ी, प्रयास जी सड़क पर ही खड़े नजर आये, जल्दी से बैठाया और कार अपने लक्ष्य की ओर दौड़ने लगी, फिर बातों का सिलसिला चल पड़ा|ऐसा लग रहा था कि मानो गाड़ी और बातों की स्पीड प्रतिस्पर्धा कर रही हो |
शीघ्र ही बरेली पहुँच गया था आ. राजेश मिश्र प्रयास जी को एक काम से किसी से मिलना था, वहाँ गया, काम निपटाया, चाय नाश्ता किया और आगे बढ़ गया|
मुरादाबाद पहुँचा, वहाँ हम सबको एक चौराहे पर छोड़कर आलोक जी आ. रश्मि वर्मा रश जी को लेने उनके घर गये और हम सब सड़कें नापते रहे|
पौन घण्टे बाद आपके दर्शन हुए, कब तक हम सब चाय नाश्ता कर चुके थे, मैंने पान खाया और कार पर बैठ आगे बढ़ गया, कुछ दूर आगे बढ़ने पर भूख ने जोर पकड़ा, एक ढाबे पर रुका, रश्मि जी पूड़ी, मेंथी सब्जी लायी थीं, और प्रयास जी कचौड़ी चटनी लाये थे, ढाबे से चाय ली और खाने पर टूट पड़े, खा पीकर आगे बढ़े, प्रयास जी ने अमरूद रास्ते में खरीदे थे अब उनका नम्बर था|प्रयास जी काला नमक लगा लगाकर दे रहे थे और हम सब गटक रहे थे |कुछ और आगे बढ़कर गुलाबजामुन खाये, मजा आ गया, फिर आगे की ओर लपके, रास्ते में उत्तराखंड अध्यक्ष ओमप्रकाश फुलारा प्रफुल्ल जी जो कि सुबह ही पहुँच चुके थे और महाराष्ट्र के देवेन्द्र चौधरी जी भी आ गये थे, से बात होती रही|आ. सुशीला धस्माना मुस्कान दीदी भी दिल्ली से आ रहीं थीं|प्रभु कृपा से शाम चार बजे हरिद्वार पहुँच ही गये |माता वैष्णो देवी शक्ति धाम में कार्यक्रम की और रुकने का व्यवस्था पूर्व निर्धारित थी|चाय पीकर कुछ व्यवस्थाओं का अवलोकन किया, माता वैष्णो देवी ट्रस्ट के महंत श्री सुमित जी महाराज के मुलाकात थी सौम्यता सहजता, सरसता और विनम्रता आपके गुणों की चमक को बढ़ा रहा था|कुछ देर बाद मैं प्रफुल्ल जी के साथ घूमने चला गया, फिर लौकर फूल माला की व्यवस्था की, प्रयास जी के बच्चे की, मुस्कान दीदी और उनकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है जब यह समाचार मिला तो मन दुःखित हुआ|पर संयम के साथ कार्यक्रम को सम्पन्न करना था, अतैव सामान्य सा दिखा|
      शाम 6:30 पर माता सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम अध्यक्ष आ. गुरुजी महंत श्री दुर्गा दास जी महाराज ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया |तत्पश्चात सभी साहित्यकारों का स्वागत अभिनंदन किया गया |आ. देवेन्द्र चौधरी जी को विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत की महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष बनाया गया और आ. रश्मि वर्मा रश जी को नारी समृद्धि मंच का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, इस आशय का सम्मान पत्र, माला व पुष्प गुच्छ ,बाँसुरी, मुहब्बत गजल संग्रह, नंदिनी काव्य संग्रह, दोशाला ओढ़ाकर ,बैज लगाकर प्रदान किया गया |उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष आ. ओमप्रकाश प्रफुल्ल जी को रजत पत्र के साथ 1000₹ की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया |आ. दुर्गा दास महाराज जी को व आ. महंत श्री सुमित मिश्रा जी महाराज की भी यथोचित अंगवस्त्र के साथ सम्मानित किया गया |आ. जागेश्वर प्रसाद निर्मल दादाश्री द्वारा रचित पुस्तक यजुर्वेद प्रकाश का विमोचन आ. महंत श्री दुर्गा दास जी महाराज ने किया ,जिसमें सभी रचनाकारों ने भाग लिया |अन्य रचनाकारों का भी यथोचित स्वागत सत्कार करने के बाद एक दौर कविता का चला, आनंद आ गया |
  कार्यक्रम समापन वेला में आ. मुस्कान दीदी भी मिठाई लेकर आ गयीं ,उनका भी ससम्मान स्वागत किया गया, कुशलक्षेम पूछी, उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, फिर सभी साथियों ने स्वादिष्ट भोजन किया और सर्दी होने के कारण कमरे में एकत्रित हुए,सबको मुस्कान दीदी ने मिठाई खिलाई, और किए गये वादानुसार सबके 500₹ आ. प्रफुल्ल जी ने वापस किए|फिर काफी देर बातें हुईं |कई साथियों ने संस्था को स्वेच्छापूर्वक सहयोग राशि प्रदान की|
आ. रश्मि जी ~500₹
आ. देवेन्द्र चौधरी जी ~500₹
आ. आस दादाश्री ~500₹
आ. मुस्कान दीदी ~500₹
आ. कौशल आस दादा ~500₹
आ. प्रफुल्ल जी ~500₹
आ. प्रयास जी ~500₹
इस पावन यज्ञ में 1000₹ की आहुति मेरे द्वारा भी समर्पित की गयी|मुस्कान दीदी के साथ अन्य कई साथी लोग आये थे जो हरिद्वार से ही थे, विदा ले उन्हीं के साथ चली गयीं|बातें करते करते हम सब सो गये |
प्रातः उठा ही था कि देखा आ. रश्मि जी चाय बनाकर ले आयीं थीं सबने चाय पी, आ. रश्मि जी का स्वभाव बहुत ही मृदुल है, सौम्य आस्थावान, दयावान व्यक्तित्व, आपकी सहनशीलता और कुछ कर गुजरने की ललक सबको आकर्षित कर लेती है |
सभी दैनिक क्रिया से निपट कर विचारगोष्ठी कक्ष में पहुँचे, जिसकी अध्यक्षता महंत श्री सुमित मिश्रा महाराज जी ने की|जहाँ विशिष्ट अतिथि के रूप में एक और संत शिरोमणि साक्षी को रूप में बैठे थे|जहाँ सभी पदाधिकारियों के विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के कार्यों को गति देने वाले अपने अपने विचारों को रखा, बृद्ध सेवा घर के निमित्त संस्था को एक लाख रुपये जमीन क्रय करने हेतु देने की घोषणा आ. आलोक सैनी जी ने की|प्रिय प्रयास जी का सरस प्रयास प्रफुल्ल जी की सक्रियता, आस जी का विश्वास,  देवेन्द्र आलोक के साथ मुस्कान रश्मि आनंद का कारण बनती है, जो संस्था विकास की दिशा निर्धारण में सम्बल बनती है, यह गौरव का विषय है | आ. कार्यक्रम अध्यक्ष सुमित मिश्रा जी महाराज ने कहा कि माता वैष्णो देवी शक्ति धाम आपका है जब चाहें कार्यक्रम करें, आप सबके लिए हमेशा इसके द्वार खुले हैं|महाराष्ट्र की धरती से पधारे देवेन्द्र चौधरी जी ने बरबस ही सबको वश में कर कर लिया था, जादूगर सा जादू चलाते हैं, संस्था की महाराष्ट्र इकाई को कितना आगे ले जाते हैं, यही देखना है |अध्यक्ष नियुक्त कर संस्था गौरवान्वित है |
     प्रिय देवेन्द्र जी और प्रफुल्ल जी को वहीं छोड़ कर हम ऋषिकेश की ओर बढ़ गये, रामझूला के आगे चोटीवाला रेस्टोरेन्ट में खाना खाया, समयाभाव के कारण उस रमणीक स्थान से वापस लौटना पड़ा, और घर की ओर चल दिया|रास्ते भर नोकझोंक के साथ हँसीमजाक करते हुए हम सब मुरादाबाद पहुँचे, जहाँ आ. रश्मि जी के अनुरोध पर उनके घर पहुँचे चाय नाश्ता किया, दोनों बच्चियों सहजल और सिद्धि से मिला, बच्चे दोनों बहुत प्यारे लगे|शीघ्र ही रश्मि जी से विदा ले आगे बढ़ा,प्रफुल्ल जी भी रास्ते में थे, देवेन्द्र चौधरी जी वहीं रुके थे क्योंकि उन्हें अगले दिन जाना था|अर्धरात्रि में निज निवास स्थान पर पहुँचा, सबको छोड़ते हुए, कार खड़ी करके मैं और आलोक अपने अपने घर की ओर बढ़े |

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दिलीप कुमार पाठक "सरस"

शिव छन्द (राम - राम)

🍁🎊 शिव छंद 🎊🍁         चार चरण प्रति चरण ११ मात्राएं, ३,६,९, वीं मात्रा लघु | दो-दो चरण सम तुकांत , आवश्यकतानुसार गुरु को २ लघु में लिख स...