कौशल कुमार पाण्डेय "आस"
आशुकवि आस जी का परिचय
आस सभी मुझको कहें, कौशल मेरा नाम।
है कटराबाजार बिच,बीसलपुर में धाम।।
सन सत्तावन पाँच दस,जन्मा था अप्रैल।
मिलूं सभी से नेह से,रखूँ न मन में मैल।।
जननी सावित्री भली,पालक थे जगदीश।
उनके चरणों में झुका,सदा आस का शीश।।
स्नातकोत्तर तक मैं पढा़,बढा़ ईश से प्रेम।
जप तप पूजन पाठ फिर, यह जीवन का नेम।।
मान और सम्मान में पाये बहुत प्रमाण।
हृदय सुकोमल ही रहा,हुआ नहीं पाषाण।।
जय जय हिन्दी पटल का,होवे खूब विकास।
संरक्षक हूँ ट्रस्ट का,मेरा यही प्रयास।।
सृजन और साहित्य से,मुझे बहुत है प्यार।
आप सभी मिल कर करें, इसका खूब प्रसार।।
यह जय जय परिवार है,आप सभी हैं अंग।
मिलजुल कर हम सब रहें,अमर बने यह संग।।
अभिनंदन वंदन करूँ, करता सबसे आस।
जय जय चमके सूर्य सम,सबका रहे प्रयास।।
_________________
कौशल कुमार पाण्डेय
आस" बीसलपुरी।।
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परिचय मेरा लो पढो़, बीसलपुर है धाम।
'आस' सभी कहते मुझे, 'कौशल' मेरा नाम।।
जननी सावित्री बनी, पालक थे जगदीश।
स्नातकोत्तर तक पढा़, ध्यायूँ प्रतिपल ईश।।
सेवाभाव हृदय भरा, साहित्यक यह चित्त।
ईश प्रेम में डूबकर, चाहा कभी न वित्त।।
मान और सम्मान में, पाये बहुत प्रमाण।
सुख-दुख कानन जन्म यह, हृदय नहीं पाषाण।।
संरक्षक पद को लिये, करता इतनी आस।
शोभित जय जय पटल हो, करिये सभी प्रयास।।
अभिनंदन वंदन मेरा, करना सब स्वीकार।
यत्न करो ऐसा सभी, होवे पटल प्रसार।।
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कौशल कुमार पाण्डेय
आस"बीसलपुरी।
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आशुकवि आस जी का परिचय
आस सभी मुझको कहें, कौशल मेरा नाम।
है कटराबाजार बिच,बीसलपुर में धाम।।
सन सत्तावन पाँच दस,जन्मा था अप्रैल।
मिलूं सभी से नेह से,रखूँ न मन में मैल।।
जननी सावित्री भली,पालक थे जगदीश।
उनके चरणों में झुका,सदा आस का शीश।।
स्नातकोत्तर तक मैं पढा़,बढा़ ईश से प्रेम।
जप तप पूजन पाठ फिर, यह जीवन का नेम।।
मान और सम्मान में पाये बहुत प्रमाण।
हृदय सुकोमल ही रहा,हुआ नहीं पाषाण।।
जय जय हिन्दी पटल का,होवे खूब विकास।
संरक्षक हूँ ट्रस्ट का,मेरा यही प्रयास।।
सृजन और साहित्य से,मुझे बहुत है प्यार।
आप सभी मिल कर करें, इसका खूब प्रसार।।
यह जय जय परिवार है,आप सभी हैं अंग।
मिलजुल कर हम सब रहें,अमर बने यह संग।।
अभिनंदन वंदन करूँ, करता सबसे आस।
जय जय चमके सूर्य सम,सबका रहे प्रयास।।
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कौशल कुमार पाण्डेय
आस" बीसलपुरी।।
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परिचय मेरा लो पढो़, बीसलपुर है धाम।
'आस' सभी कहते मुझे, 'कौशल' मेरा नाम।।
जननी सावित्री बनी, पालक थे जगदीश।
स्नातकोत्तर तक पढा़, ध्यायूँ प्रतिपल ईश।।
सेवाभाव हृदय भरा, साहित्यक यह चित्त।
ईश प्रेम में डूबकर, चाहा कभी न वित्त।।
मान और सम्मान में, पाये बहुत प्रमाण।
सुख-दुख कानन जन्म यह, हृदय नहीं पाषाण।।
संरक्षक पद को लिये, करता इतनी आस।
शोभित जय जय पटल हो, करिये सभी प्रयास।।
अभिनंदन वंदन मेरा, करना सब स्वीकार।
यत्न करो ऐसा सभी, होवे पटल प्रसार।।
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कौशल कुमार पाण्डेय
आस"बीसलपुरी।
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वाह्हह्हह्ह वाह्हह्हह्ह गजब
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