Monday, 16 September 2019

विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के संस्थापक दिलीप कुमार पाठक सरस जी का सन्देश



      जय जय 
      💓🙏🏻💓
कलमकार साथियों को सादर नमस्कार ~💓🙏🏻💓

दो शब्द 

आप सबकी गरिमामयी उपस्थिति  से जय जय हिन्दी गौरवान्वित है |आप सबको कोटिशः बधाई एवं शुभकामनाएँ|

एक सुझाव सभी रचनाकारों के बीच साझा करने का प्रयास मात्र ~

आप सभी साथियों से निवेदन है कि काव्य के अनेक तत्व होते हैं |काव्य विधा के अनेक भेद, उपभेद हैं| तो रचना लिखने के बाद और पटल पर प्रेषित करने से पहले~
1- एक बार रचना का अवलोकन स्वयं करें|
2- रचना का शीर्षक ही रचना को पहचान दिलाती है, रचना शीर्षक अंकित करें|
3- रचना काव्य की किस विधा में है, अंकित होगा तो पढ़ने में पाठक को आनंद आयेगा|
4-विधा का विधान अंकित होगा तो अन्य साथियों को सीखने का सुअवसर प्राप्त होगा|एक दूसरे से हम सभी सीखते हैं|
यदि हम रचनाकार हैं तो रचनाकार धर्म का पालन करना भी हमारा कर्तव्य होना चाहिए |
क्योंकि समाज एक अच्छे साहित्यकार से बहुत कुछ सीखता है|
आइए हम सब सीखने सिखाने की परम्परा को मजबूती प्रदान करें|
पुनः हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ सभी साथियों को |आप सबकी सक्रिय उपस्थिति से जय जय हिन्दी को शक्ति मिल रही है ,इस क्रम को और ऊर्जा प्रदान करें |
सस्नेह जय जय 
🌹🙏🏻🌹

दिलीप कुमार पाठक "सरस"
संस्थापक 
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत 
🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹


4 comments:

  1. सादर आभार ऑ. डॉ. राहुल शुक्ल साहिल दा श्री,
    साथ जनचेतना ट्रस्ट भारत व्लॉगर के रूप में जो शक्ति प्रदान कर रहा है, इसका मूर्त रूप आप ही हैं |
    हार्दिक बधाई!
    दिलीप कुमार पाठक "सरस"

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  2. वाह-वाह,बहुत ही आवश्यक एवं उपयोगी संदेश दिया है आपने मान्यवर सरस जी,हार्दिक बधाई!
    --बाबा बैद्यनाथ🌹👌🙏🏻🕉🌹

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    Replies
    1. हार्दिक आभार आ0 बाबा वैद्यनाथ झा दादाश्री

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  3. बहुत उत्तम सुझाव है आदरणीय ।बिल्कुल सही कहा यदि पोस्ट करने से पहले हम स्वयं अपनी रचना का अवलोकन करेंगे तो जो टँकन त्रुटियाँ या कमी रह गई होगी उसे सहज दूर कर सकेंगे।

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